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बाहर से आने वालों को शरण देने पर होगी कार्रवाई

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शादियाबाद/खानपुर। थाना परिसर में शनिवार को कोविड-19 (कोरोना वायरस) की महामारी जैसे घातक रोग की रोक-थाम के लिए थाना परिसर में एसडीएम की अध्यक्षता में धर्मगुरुओं के साथ बैठक हुई। इसमें जखनिया एसडीएम सूरज यादव ने कहा कि कोरोना घातक बीमारी है, जो जात-पात या संप्रदाय नहीं देखती। जो इसके संपर्क में आएगा, वह प्रभावित हो जाएगा। सावधानी ही इससे बचाव का रास्ता है।
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उन्होंने सभी धर्मगुरुओं से कहा कि जो भी सर्दी, जुकाम, बुखार से बीमार होता है और उसकी सूचना जिला प्रशासन से छिपाता है तो उस व्यक्ति के साथ ही शरण देने वाले व्यक्ति के ऊपर भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस जिले में इस महामारी से बचाव के लिए विशेष ध्यान देना होगा कि मरकज से आए हुए लोग किन-किन स्थानों पर गए और किस-किस से मिले तथा कहां-कहां रुके इसकी भी सूचना उपलब्ध कराएं, जिससे संपर्क वाले व्यक्ति को भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से क्वारंटीन किया जा सके। इस मौके पर क्षेत्राधिकारी भुड़कुड़ा, थाना प्रभारी सुदेश कुमार सिंह, हनुमान सिंह, जयराम सिंह, बबलू चौहान, विजय कश्यप, अनिल कुमार, ताहिर हुसैन, शकीलुद्दीन, ताहिर हुसैन, निहालुद्दीन, बाबा खरभू चौहान, सुभाष कुशवाहा, रियाय अहमद, शमशेर खां, असलम सिद्दीकी, गोविंद, गौरी प्रधान आदि उपस्थित थे। उधर खानपुर थाना में धर्मगुरुओं के साथ ही उपजिलाधिकारी अनिरुद्ध प्रताप सिंह ने बैठक की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि कोरोना एक खतरनाक बीमारी है। सावधानी ही इससे बचाव का रास्ता है। बाहर से किसी भी व्यक्ति के आने पर इसकी सूचना तत्काल स्थानीय पुलिस को दी जाए। किसी भी हाल में ऐसे लोगों को पनाह न दिया जाए। अगर कोई पनाह देता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। कहा कि लाकडाउन का पालन करें, घरों से बाहर न निकलें। आप लोगों के सहयोग से ही इस खतरनाक बीमारी से बचा जा सकता है। इस अवसर पर सीओ सैदपुर महिपाल पाठक आदि उपस्थित थे।
संकट की घड़ी में साथ देने पर धन्यवाद दिया
जमानिया। उपजिलाधिकारी सत्यप्रिय सिंह ने सभी संभ्रांत नागरिकों, समाजसेवी एवं स्वयं सहायता समूहों को संकट की इस घड़ी में प्रशासन का कंधे से कंधा मिलाकर साथ देने के प्रति धन्यवाद दिया। उन्होंने अनुरोध किया कि संक्रमण के फैलाव को देखते हुए विशेषकर तब जब कोरोना ने अपने जिले में भी पांव पसार लिया हैं। ऐसी स्थिति में राहत सामग्री एवं अन्य खाद्य पैकेट स्वयं वितरित करने के बजाय तहसील मुख्यालय में बनाए गए कलेक्शन सेंटर में उपलब्ध कराएं। जहां से प्रशासन एवं पुलिस की उपस्थिति में सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए जरूरतमंदों को राहत सामग्री उपलब्ध कराया जा सके। तापमान में निरंतर हो रही वृद्धि के परिणाम स्वरूप पका हुआ डिब्बा बंद खाने की गुणवत्ता कुछ ही घंटे में तेजी से नष्ट हो जाती है। इसका भी विशेष रूप से ध्यान रखने की आवश्यकता है। अगर संभव हो तो कच्चा अनाज ही उपलब्ध कराएं।
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