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Ghazipur News: गीतों और गजलों से यादगार हुई शाम

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उर्दू पत्रकारिता के दो सौ साल पूरे होने पर उर्दू के मशहूर पत्रकार स्वर्गीय हारून रशीद खां अलीग की याद में बज्म-ए-अदब मनिया की ओर से रविवार को गांव स्थित अहाते में मुशायरा व कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। जिसमें विभिन्न स्थानों से आए कवियों व शायरों ने प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ हाफिज ताहिर के तिलावत ए कलाम पाक से हुआ।
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इसी के साथ अहाता पूरी तरह साहित्यिक माहौल में तब्दील हो गया। श्रोता कविता और शेर-ओ-शायरी पर झूमते रहे। कार्यक्रम में डा. साजिद गाजीपुरी ने अपने मुशायरे से जहां चार चांद लगा दिया, वहीं नजर गाजीपुरी ने गम में औरों के जलते रहे, मोम थे हम पिघलते रहे। ये तो मां की दुआ थी कि हम, हादसों से संभलते रहे।
अहकम गाजीपुरी ने बाबा आदम की खता को जो खता कहते हैं, उनको कम जर्फ़ सभी अहले वफ़ा कहते हैं पढ़ा। इरशाद खलीली ने पढ़ा चल रहा है ये जमाना नफरतों तफरीक पर, ऐ मोहब्बत बात आ पहुंची तेरी तहकीक पर। इनके आलावा अख्तर कुरैशी, अयूब सैफी, मिथिलेश गहमरी, भोजपुरी के वयोवृद्धि कवि अनंतदेव पांडेय, बादशाह राही, शमीम गाजीपुरी, मुमताज साहिल, आसी युसूफपुरी,चंचल युसूफपुरी, सीपी सुमन आदि ने अपने गजल और शायरी के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों पर प्रहार किया।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे बारा साहित्य मंच के सरपरस्त सरवत महमूद खां ने बज्म-ए-अदब मनिया का अर्थ पेश करने के साथ ही इस कमेटी के बनाने के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। संचालन डा. नाहिद एवं खान ज्या मोहम्मद क़ासिम ने संयुक्त रुप से किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रसिद्ध लेखक शाहनवाज खान मुजाहिद, मंसूर आलम खान आदि का योगदान रहा। इस दौरान ग्राम प्रधान मनिया शब्बीर खान, कुंवर नसीम रजा खान, डाक्टर वसीम रजा, इक़बाल खान, शाहनवाज खान बीडीसी, हैदर खान,अबुबकर खान उर्फ बेचन सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
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