पड़ोसी राज्य बिहार में शराब बिक्री पर प्रतिबंध के चलते सीमा से सटे गांवों में शराब की दूकान खोलने के लिए शराब कारोबारियों में होड़ मची है। बिहार सीमा से सटे गाजीपुर के गांवों में शराब की दूकान खोलने के लिए बड़े पैमाने पर आवेदन किए गए हैं। कुतुबपुर में सिर्फ एक दूकान के लिए 105 लोगों ने आवेदन फार्म भरा है। इसके पीछे उनकी मंशा यह है कि दूकान खोलने के बाद क्षेत्र में ही नहीं बल्कि यहां की शराब बड़े पैमाने पर बिहार के सीमाई क्षेत्रों में खपेगी जिससे कमाई अधिक होगी।
बिहार में शराब की खुलेआम बिक्री पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद कारोबारियों की बेचैनी बढ़ गई है। इसके लिए अब वे आसपास के क्षेत्रों में हाथ पांव मारने लगे हैं। इस स्थिति में उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र में शराब का धंधा बेहतर आय के रूप में देखा जाने लगा है। जिले के गहमर थाना की बिहार सीमा से सटे इलाकों में नई दूकानें खोली जा रही हैं। ऐसे स्थानों पर भी देशी शराब बेचने के लाइसेंस निर्गत किए गए हैं, जहां पहले कभी शराब की कोई दूकान नहीं हुआ करती थी।
बिहार राज्य से सटे जिले के गहमर थाना क्षेत्र में देशी शराब की दो दूकानें खोली जा रही हैं। ये दूकानें ऐसी जगहों पर हैं, जहां से आसानी से बिहार में धंधा किया जा सकता है। गहमर थाना क्षेत्र की सीमा पर बारा कुतुबपुर में पहली बार देशी शराब की दूकान खुल रही हैं। गहमर थाना क्षेत्र के सेवराई पुलिस चौकी के बिहार के रामपुर से सटे देवल में शराब दूकान का नया लायसेंस दिया गया है। बिहार की सीमा से सटी इन दूकानों से बिहार से कोई भी टहलते हुए शराब ले जा सकता है। सीमा पर बिहार के शराब माफिया में ठेका लेने के लिए मारामारी मची हुई है। प्रदेश में लाटरी पद्धति से शराब की दूकान का लाइसेंस देने की व्यवस्था है। बारा कुतुबपुर स्थित शराब दूकान के लिए एक आवेदन फार्म की न्यूनतम कीमत 25,100 रुपये रखी गई है और 105 लोगों ने फार्म खरीद अपना दाव लगाया है।