गाजीपुर। गंगा का जलस्तर एक सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से घटने लगा है। लेकिन, बाढ़ प्रभावित इलाकों में दुश्वारियाें की बाढ़ बरकरार है। रेवतीपुर क्षेत्र के विरऊपुर और हसनपुरा गांवों की बाढ़ प्रभावित पांच हजार से अधिक की आबादी के आवागमन के लिए केवल एक नाव की व्यवस्था की गई है। जबकि बाढ़ के पानी से घिर जाने के कारण दोनों गांवों का संपर्क अन्य गांवों से कट गया है।
गंगा का जलस्तर रविवार की शाम छह बजे 63.070 मीटर पर स्थिर हो गया था। इसके बाद सोमवार को सुबह नौ बजे जलस्तर में घटाव दर्ज किया गया। डेढ़ सेमी की रफ्तार से जलस्तर घट रहा था। सोमवार को दोपहर तीन बजे घटाव की रफ्तार कम हुई और यह एक सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से घटने लगा। नगर के गंगा घाटों की अधिसंख्य सीढि़यां पहले की तरह जलमग्न हैं। नालों में बाढ़ का पानी भर गया है। भांवरकोल क्षेत्र के मुबारकपुर से गहमर सिवान तक सात बीघा जमीन कटान की भेंट चढ़ चुकी गई।
गहमर : बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित विरऊपुर और हसनपुरा गांवों के संपर्क मार्गों पर बाढ़ का पानी भर गया है। इससे इनका संपर्क पहले ही टूट चुका है। वर्तमान में दोनों गांवों के लोग खरीदारी व अन्य कार्यों के लिए नाव का इस्तेमाल कर रहे हैं। उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों के लिए भी नाव ही सहारा बनी है। लेकिन, एकमात्र नाव नाकाफी साबित हो रही है। ग्रामीणों की मांग है कि कम से कम चार नावों की व्यवस्था की जाए। नाव भर जाने पर कई लोग नाव के लौटने की प्रतीक्षा करते हैं। जब नाव वापस आती है, तो लोग उसमें सवार होते हैं।
औड़िहार : गंगा का पानी घटने के बाद भी ग्रामीणों को राहत नहीं मिल पाई है। खेतों में पहले की तरह पानी भरा हुआ है। कुछ इंच तक ही खेत खाली हो पाए हैं। पटना, शादी-भादी, चकेरी, फुलवारी, फुलवारी कला, औड़िहार आदि जगहों पर पानी में डूबे खेत नजर आ रहे हैं। पटना के वकील यादव ने बताया कि मेरा खेत थोड़ा ऊपर है। यदि जलस्तर दो फीट और ऊपर बढ़ता है तो मेरी भी सब्जियां डूब जाएंगी। अनिल यादव ने बताया कि मेरा घर खेत में गांव से थोड़ा बाहर है। बाढ़ का खतरा सबसे पहले हम लोगों के घर की तरफ ही पहुंचता है।
मौधा : गोमती नदी के उफान में स्थिरता देखी गई है। गौरहट गांव के मुख्य मार्ग पर पानी पसरने के कारण आवागमन बाधित है।