भास्कर दूबे को राखी बांधती नूरजहां। संवाद
मजहब की दीवारें भाई-बहन के रिश्ते के सामने बौनी साबित हो गईं। रक्षाबंधन पर चोचकपुर गांव में करीब 30 साल पुराने हिंदू-मुस्लिम भाई-बहन के रिश्ते की परंपरा एक बार फिर देखने को मिली। चंदौली स्थित ससुराल से मायके पहुंचीं नूरजहां ने हिंदू ब्राह्मण परिवार के भास्कर दूबे की कलाई पर चांदी की राखी बांधी।
दोनों ने हर साल की तरह इस बार भी इस रिश्ते को पूरी आत्मीयता से निभाया। चोचकपुर निवासी स्व. मुहम्मद सौदागर की बेटी नूरजहां का कोई सगा भाई नहीं था, जबकि भास्कर दूबे की भी कोई बहन नहीं है।
वर्षों पहले दोनों के बीच भाई-बहन का रिश्ता बना, जो समय के साथ और मजबूत होता गया। नूरजहां के पिता पेशे से दर्जी थे और साधारण परिवार से ताल्लुक रखते थे।
शादी के बाद नूरजहां चंदौली में रहती हैं, लेकिन रक्षाबंधन पर करीब तीन दशक से मायके चोचकपुर पहुंचकर भास्कर की कलाई पर राखी बांधती हैं। भास्कर भी भाई का फर्ज निभाते हुए हर बार बहन का स्वागत करते हैं और इस रिश्ते की गरिमा बनाए रखते हैं। रक्षाबंधन पर निभाया जाने वाला यह रिश्ता क्षेत्र में सांप्रदायिक सौहार्द, आपसी प्रेम और भाईचारे की मिसाल बन गया है। दोनों परिवारों की आत्मीयता बताती है कि रिश्ते मजहब से नहीं, बल्कि विश्वास और अपनत्व से बनते हैं।