गाजीपुर। जिले के 1700 से अधिक सरकारी हैंडपंपों को स्थापित करने के नाम पर किए गए करोड़ों के खेल के मामले में अभी तक अधिकारी जांच नहीं कर सके हैं। जबकि जिला पंचायत सदस्य ब्रजभूषण दूबे ने हैंडपंपों की जांच की मांग की थी। हैंडपंपों की जांच में अफसर भी कम जिम्मेदार नहीं है। यदि जिले के जिम्मेदार अफसर चाहते तो जलनिगम के अभियंताओं के विरुद्ध कार्रवाई होती लेकिन अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
जिला पंचायत सदस्य ब्रजभूषण दूबे ने सीडीओ से शिकायत की थी कि सरकारी हैंडपंप लगाने में मानक की अनदेखी की गई है। कहीं बीस मीटर तो कहीं 50 मीटर में ही हैंडपंप लगा दिए गए हैं। जिलाधिकारी की तरफ से रीबोर हुए हैंडपंपों की जंाच में जलनिगम के अधिकारी दोषी पाए गए थे। लेकिन अभी तक किसी भी दोषी अभियंता के विरुद्ध मुकदमा कायम नहीं किया गया। इसके साथ ही उन्होंने कई और गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि सरकारी हैंडपंपों के स्थापित करने में जमकर गड़बड़ी की गई है। उन्होंने बताया कि हमारे क्षेत्र में लगे सरकारी हैंडपंप दूषित पानी दे रहे हैं। कई हैंडपंपों का प्लेटफार्म नहीं बनाया गया है। कई इलाकों में जलनिगम के ठेकेदार हैंडपंप लगाने के लिए डीजल और सामान ढोने के लिए पैसे की मांग करते हैं। जबकि शासन ने प्रत्येक हैंडपंपों को स्थापित करने के नाम पर पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराया है। यह मामला मुख्य विकास अधिकारी रामअवतार के पास भी गया था लेकिन उन्होंने ऐसे लोगों को जांच सौंप दी जिससे अभी तक एक भी अधिकारी के विरूद्ध कार्रवाई नहीं हो सकी। जबकि जिलाधिकारी की तरफ से कराई रीबोर कराए गए हैंडपंपों की जांच की गई थी तो बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई लेकिन उन अभियंताओं के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हो पाई। इस संबंध में जब सीडीओ रामअवतार से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि हैंडपंपों को स्थापित करने के नाम पर गड़बड़ी करने वाले अभियंताओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।