दुबिहा । क्षेत्र के मां कष्टहरनी मंदिर में संगीतमय भागवतकथा के तहत बुधवार को कृष्ण-रुक्मणि विवाह से लेकर कंस वध तक की कथा प्रस्तुति की गई। इस दौरान विवाह की मनमोहक झांकी देख लोग मंत्रमुग्ध हो गए। भगवतकथा का अमृतपान करा रहे महामंडलेश्वर शिवराम दास फलाहारी बाबा ने कहा कि कंस का वध कर भगवान ने एक पापी का नाश किया तथा धर्म की फिर से स्थापना की।
मंच पर विवाह की झांकी की विशद व्याख्या करते हुए फलाहारी बाबा ने कहा कि यह जीव और परमात्मा का मिलन है। यह दृश्य जीवों के लिए एक संदेश है। हर जीव का उद्देश्य परमात्मा से मिलन के लिए होता है। उन्होंने कहा कि कंस एक दुराचारी प्रवृत्ति का था। जब उसे इस बात की जानकारी हुई कि उसकी बहन देवकी का ही आठवा पुत्र उसका संहार करेगा, तो वह डर गया। उसने बासुदेव तथा देवकी को जेल में बंद कर दिया। अपने पिता, बहन, जीजा पर वह लगातार जुल्म करता रहा। आखिरकार उसके पाप का घड़ा भर गया तथा भगवान कृष्ण ने भरी सभा में कंस का संहार किया।
इस मौके पर रमेश राय, दिनेश राय, अवनीश राय, पंकज, कृपाशंकर आदि उपस्थित थे। वहीं, कचहरी रोड स्थित हंसयोग आश्रम में सतसंग का आयोजन किया गया। इस दौरान महात्मा सहयोगानंद जी ने कहा कि ईश्वर ने हमें मानव जीवन दिया है। लिहाजा, हमें इसे संमार्ग के कार्यों में लगाना चाहिए। इस मौके पर बबलू, दुखंती यादव, श्वेता, कन्हैया गुप्ता, रामलखन, प्रदीप, अशोक, दीनदयाल, राधेश्याम, विनोद आदि उपस्थित थे।