गाजीपुर। मानकों की कमी और कागजातों में धोखाधड़ी कर फर्जी नर्सिगिंहोम संचालन के मामले में शुक्रवार को अपर सत्र न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट की अदालत ने दो अस्पताल संचालकों की जमानत अर्जी नामंजूूर करते हुए जेल भेज दिया।
एक वर्ष पूर्व शिकायत मिलने पर तत्कालीन सीडीओ राजबहादुर तथा मुख्य चिकित्साधिकारी डा. आरपी गुप्ता ने सदर कोतवाली क्षेत्र के चंद्रशेखर नगर रौजा स्थित गुरु दिव्यांश हास्पिटल तथा शिवलक्ष्मी हास्पिटल मेें छापेमारी की थी। इस दौरान नर्सिगिं होम संचालन के मानक में न सिर्फ कमी पाई गई थी बल्कि कर्मचारी भी अप्रशिक्षित पाए गए थे। दोनों अस्पतालों का संचालन डा. शिवकुमार जायसवाल के रजिस्ट्रेशन पर था। जिन लोगों के आपरेशन किए गए थे उससे संबंधित डाक्टर तथा मरीज को दी जाने वाली दवाइयों का कोई रिकार्ड नहीं था। आरोप था कि गुरु दिव्यांश नर्सिगिंहोम के प्रबंधक डा. यूके सिंह बिना डिग्री के मरीजों का आपरेशन करते थे, वहीं शिवलक्ष्मी हास्पिटल के संचालक डा. मनोज कुमार वर्मा के पास भी कोई वैध डिग्री नहीं थी। दोनों आरोपी डाक्टरों के खिलाफ सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया था। हाईकोर्ट का आदेश प्राप्त कर दोनों गिरफ्तारी से बचे रहे। बाद में उच्च न्यायालय से अंतरिम जमानत का आदेश प्र्राप्त कर पिछले सप्ताह मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश हुए। अंतरिम जमानत पर दोनों बाहर थे। शुक्रवार को दोनों आरोपियों की जमानत पर सुनवाई हुई। अदालत ने आरोपों को गंभीर प्रकृति का पाते हुए जमानत का आधार नहीं मिलने पर जमानत अर्जी नामंजूर कर दी। साथ ही दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भी भेज दिया।