औड़िहार(गाजीपुर)। सेवानिवृत्त अपर आयुक्त ओमप्रकाश चौबे (ओम धीरज ) ने कहा कि देश में बढ़ रही उपभोक्तावादी संस्कृति के चलते मूल्य टूट रहे हैं। आपाधापी के दौर में नैतिकता समाप्त सी होने लगी है। ऐसे में आने वाली पीढ़ी और खासतौर से ब्राम्हण समाज के लोगों को भारतीय संस्कृति को पूरी जिम्मेदारी के साथ संभालना होगा।
यह बात सैदपुर के ककरहीं ग्राम में ब्राम्हण समाज के सिरमौर भगवान परशुराम की भव्य मूर्ति का अनावरण करने के बाद वहां आयोजित वर्तमान परिवेश में संस्कारों का महत्व विषयक संगोष्ठी में बतौर अध्यक्ष उन्होंने कही। कहा कि व्यक्ति से बड़ा उसका व्यक्तित्व होता है। व्यक्तित्व तभी महान होता है जब उसका संस्कार बेहतर हो। ब्राम्हण सदा से सभी समाज की अगुवाई करता रहा है। आज ब्राम्हण समाज बिखरा हुआ है। इस समाज को एकजुट रहने की आवश्यकता है। पीजी कॉलेज के प्रवक्ता डॉ. श्रीकांत पांडेय ने कहा कि बदलते परिवेश में अपने संस्कारों को बनाए रखना और समाज में उसे कायम रखना आज की आवश्यकता है। प्रवक्ता डॉ. विनय कुमार दूबे ने कहा कि वर्तमान वैश्वीकरण करण और पश्चिमी करण सभ्यता के बीच आज का समाज अधकचरी सभ्यता में जीने को विवश है। संगोष्ठी में डॉ. हरिप्रकाश पांडेय, प्रदीप दूबे, मुन्नीलाल पांडेय, डॉ. एके पांडेय, कार्यक्रम के संरक्षक संतोष पांडेय, धर्मेंद्र मिश्रा, रामजी पांडेय आदि ने विचार व्यक्त किया। इसके पहले मूर्ति अनावरण समारोह में आए विशिष्ट ब्राम्हणों एवं मंचासीन अतिथियों का प्रतीक चिन्ह, अंगवस्त्रम देकर तथा माला पहना कर स्वागत किया गया। इस अवसर पर ओमप्रकाश पांडेय, दारोगा पांडेय, त्रिवेंद्र पांडेय, सोनू पंडित, मनींद्र दुबे, ओंकार मिश्र आदि उपस्थित थे। संचालन धर्मेंद्र मिश्र ने किया। आभार राजकुमार पांडेय ने जताया।