सुहवल(गाजीपुर)। अखिल भारतीय किसान महासभा तथा रेल प्रभावित किसान मोर्चा की ओर से जबरिया भूमि अधिग्रहण आदि मामलों को लेकर सुखदेवपुर चौराहा स्थित एक मैरेज हाल में किसान गोष्ठी आयोजित हुई। इसमें महासभा के राष्ट्रीय सचिव पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा कि सरकार पूंजीपतियों के मुनाफे के लिए कानून बना रही है। जिससे अन्य कम आय वाले खेतीहरों के लिए खेती घाटे का सौदा बन चुकी है।
कर्ज के बोझ तले दबकर किसान आत्महत्या का रास्ता अपना रहे हैं। जबरिया भूमि अधिग्रहण की मार से किसानों की हालत बदतर होती जा रही है। एक तरफ उन्हें फसलों का उचित समर्थन मूल्य तो नहीं मिलता। साथ ही खाद, बीज, दवाओं की बढ़ी कीमतों से दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। प्रदेश सरकार की किसान विरोधी नीतियों से आवारा पशुओं की तादाद बढ़ गई है। उन पर रोक लगाने की सरकार के पास कोई योजना नहीं है। किसान नेता अफरोज आलम ने कहा कि जरूरत है रेल प्रभावित किसानों का स्थलीय सर्वे कर जमीन और आबादी का मुआवजा तय करे। जमीन की सही स्थिति स्पष्ट नहीं होने तक किसान उस पर काम नहीं होने देंगे। खेती की जमीन बचाने, किसानों के कर्ज मुक्ति की लड़ाई को तेज करने के साथ फसल का दोगुना समर्थन मूल्य पाने के लिए प्रतिरोध संघर्ष को तेज किया जाएगा। वक्ताओं ने 30 नवंबर को दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की। गोष्ठी में ईश्वरी प्रसाद कुशवाहा, रामप्यारे राम, डॉ. इकबाल अंसारी, अमरनाथ यादव, गंगासागर कुशवाहा, विरेंद्र सिंह, फरीद आलम, मोती प्रधान, कमलाकर राम, मोर्चा के अध्यक्ष चंद्रिका कुशवाहा, शिवलोचन कुशवाहा, विजयबहादुर सिंह आदि रहे।