गाजीपुर। गर्भवती महिलाओं को सुविधा उपलब्ध कराने के लिए लाखों की लागत से बनवाए गए जच्चा बच्चा केन्द्रों की हालत बदहाल है। इससे उनके लिए चलाई जा रही योजनाओं का समुचित लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है। जिले भर में कई स्थानों पर इन केन्द्रों पर न तो एएनएम हैं और न ही कोई सही जानकारी देने वाला जिम्मेदार कर्मचारी। कई के भवन जर्जर हैं जहां मवेशी घूमते हैं तो कई में ग्रामीणों ने उपले और पुआल आदि रखा हुआ है।
सेवराई संवाददाता के अनुसार करीब तीन वर्ष पहले लाखों की लागत से अमौरा गांव में बनाए गए जच्चा बच्चा केन्द्र की हालत बदहाल है। इस केन्द्र को बना तो दिया गया लेकिन अभी यह पूरी तरह से अस्तित्व विहीन बना हुआ है। इसके भवन का निर्माण आधा अधूरा कर छोड़ दिया गया है। इसमें दरवाजे तथा खिड़की भी नहीं लगाया गया है। इस केंद्र पर वर्तमान समय में किसी एएनएम की तैनाती भी नहीं है। इस केन्द्र पर गर्भवती महिलाओं को किसी भी सुविधा का लाभ नहीं मिल पाता। वर्तमान में इस भवन के कमरों में ग्रामीणों ने उपले रखे हैं। परिसर में आवारा कुत्ते तथा अन्य मवेशियों ने डेरा जमा लिया है। इसी प्रकार जच्चा-बच्चा केंद्र बसुका की भी हालत दयनीय है। इस केन्द्र पर भी एएनएम की तैनाती नहीं है। भवन में दरवाजे नहीं है तथा खिड़कियां टूटी हुई हैं। पूरे परिसर में घास-फूस उग आई है। गांव के लोग भी यहां गंदगी करने से बाज नहीं आते। इस भवन में शाम के समय असामाजिक तत्व जमावड़ा लगा लेते हैं। लोगों को इस ओर से गुजरने में भी डर लगने लगता है। जखनिया संवाददाता के अनुसार भुड़कुड़ा स्थित जच्चा बच्चा केन्द्र भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। इसकी चहारदीवारी गिर गई है। भवन पूरी तरह से जर्जर है। दरवाजे तथा खिड़कियां टूटी हुई हैं। हर समय मवेशी घूमते रहते हैं। इस केन्द्र पर भी एएनएम नहीं है। जखनिया नगर सहित करीब आधा दर्जन गांवों की गर्भवती महिलाओं को इस केन्द्र से योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। टीकाकरण के लिए भी उन्हें दूसरे केंद्रों की शरण लेनी पड़ती है। जमानिया संवाददाता के मुताबिक क्षेत्र का जच्चा बच्चा केन्द्र अभईपुर करीब आठ माह से बंद पड़ा हुआ है। एएनएम का अभाव बना हुआ है। इस केन्द्र पर जाने वाली महिलाओं को मायूस होकर लौटना पड़ता है। इसी प्रकार बघरी के जच्चा बच्चा केन्द्र की दशा भी दयनीय है। यहां एक महिला दाई भर है जो सुबह शाम इस केन्द्र को खोलती तथा बंद करती है।