सादात(गाजीपुर)। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मिर्जापुर पर गुरुवार को एक कैंप आयोजित किया गया। इसमें नवजात शिशुओं को डायरिया जैसी खतरनाक और जानलेवा बीमारी से बचाने के लिए रोटा वायरस वैक्सीन का ड्रॉप पिलाया गया। चिकित्सकों के साथ ही बीपीएम ने ड्राप पिलाकर माताओं और बच्चों के अभिवावकों से इस वैक्सीन को पिलाने का आह्वान किया। डा. एके राव ने बताया कि अगर नवजात शिशु को डायरिया हो गया है या उसे बुखार या फ्लू हो गया है तो यह रोटा वायरस के लक्षण हो सकते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में कुछ साल पहले रोटा वायरस से प्रभावित बच्चों में डायरिया के गंभीर लक्षण देखे गए थे। उन्होंने बताया कि रोटा वायरस के संक्रमण से बचने के लिए दो तरह के वैक्सीन उपलब्ध हैं। यह दोनों ही बच्चों के लिए सुरक्षित हैं। बताया कि साफ-सफाई का ध्यान रख कर आप अपने शिशु को इस संक्रमण से बचा सकते हैं। यह वायरस इंसानों से फैलता है और शिशु को इससे बचाने का एकमात्र उपाय वैक्सीनेशन है। बीपीएम सोनल श्रीवास्तव ने बताया कि यह वायरस किशोरावस्था में भी प्रभावित करता है। हालांकि, बच्चों और शिशुओं के मुकाबले युवाओं में होने वाला ये वायरस थोड़ा सौम्य होता है। उन्होंने बताया कि अगर शिशु को रोटारिक्स वैक्सीन दिया जा रहा है तो दो महीने के शिशु को एक खुराक और चार महीने से अधिक माह के शिशु को एक खुराक दी जाती है। शिशु को रोटा वायरस वैक्सीन देने से पहले बरती जाने वाली सावधानियां बताने के साथ ही उन्होंने आवश्यक सुझाव दिया। इस दौरान एएनएम सोनी कुमारी समेत सभी स्टाफ उपस्थित रहा।