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सामाजिक यथार्थ के सबसे बड़े कथाकार थे मुंशी प्रेमचंद

Tue, 31 Jul 2018 11:27 PM IST
गाजीपुर
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मुंशी प्रेमचंद्र की जयंती
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गाजीपुर। नगर सहित जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में मंगलवार को महान लेखक व उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती उत्साह के साथ मनाई गई। लोगों ने कहा कि किस्से, कहानियां, उपन्यास आदि की दुनिया में मुंशी प्रेमचंद सबसे अलग रहे। यही वजह रही कि आज भी उनकी कहानी और उपन्यास की तासीर जस की तस बनी हुई है। इस मौके पर आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद हिंदी कहानी के पितामह थे। वह उपन्यास सम्राट माने जाते थे। इतना ही नहीं सामाजिक यथार्थ के सबसे बड़े कथाकार थे।
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अखिल भारतीय कायस्थ महासभा की तरफ से कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 138वीं जयंती के अवसर पर सरजू पांडेय पार्क में विचार गोष्ठी आयोजित हुई। इस मौके पर समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष रामधारी यादव ने कहा कि मुंशी जी ने आम आदमी को अपनी रचनाओं का विषय बनाया और उनकी समस्याओं पर खुलकर कलम चलाई। अध्यक्षता करते हुए महासभा के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव ने मुंशी जी सामाजिक यथार्थ के सबसे बड़े कथाकार थे। वह वस्तुत: जातिमुक्त, रुढ़ीमुक्त संपन्न नए भारत का निर्माण करना चाहते थे। महासभा के प्रांतीय उपाध्यक्ष मुक्तेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव प्रसाद श्रीवास्तव ने मुंशी जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे उर्दू एवं हिंदी के महान लेखकों में से एक थे। उन्होंने हिंदी कहानी एवं उपन्यास की एक ऐसी परंपरा कायम की, जिसने पूरी सदी के साहित्य का मार्गदर्शन किया। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राजेश कुशवाहा ने कहा कि मुंशी जी मात्र साहित्यकार ही नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थे। उन्होंने अपनी लेखनी से स्वतंत्रता आंदोलन को धार दिया। गोष्ठी में अशोक श्रीवास्तव, विरेश्वर सिन्हा, चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव, अजय श्रीवास्तव, सदानंद यादव, आनंद श्रीवास्तव, अभिनव, परमानंद श्रीवास्तव, नन्हें, राहुल, अवधेश, प्रवीण आदित्य, विजेंद्र, अभिषेक, राजेश कुमार यादव, संजय सेवराई, अमर सिंह राठौर, राजेश श्रीवास्तव, सुनीलदत्त श्रीवास्तव, प्रमोद श्रीवास्तव, शिवशंकर सिन्हा, विपिन बिहारी वर्मा, सत्यप्रकाश, पीयूष, संजय, आशुतोष, अमरनाथ आदि उपस्थित थे। संचालन मोहनलाल श्रीवास्तव ने किया। उधर कायस्थ चित्रगुप्त महासभा के तत्वाधान में महान लेखक मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर सिटी स्टेशन रेलवे स्थित शिव मंदिर आयोजित गोष्ठी का शुभारंभ मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। इस मौके पर जिलाध्यक्ष संदीप कुमार श्रीवास्तव ने मुंशी प्रेमचंद जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वह हिंदी कहानी के पितामह और उपन्यास सम्राट माने जाते थे। उनका लेख हिंदी साहित्य की एक ऐसी विरासत है, जिसके बिना हिंदी के विकास का अध्ययन अधूरा होगा। मुंशी प्रेमचंद हिंदी के लेखक ही नहीं, बल्कि एक महान साहित्यकार, नाटककार, उपन्यासकार जैसी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। प्रेमचंद की रचनाओं को देश में ही नहीं, विदेशों में भी आदर प्राप्त है। उनकी साहित्य का अंतर्राष्ट्रीय महत्व है। इस मौके पर अरुण कुमार श्रीवास्तव, परशुराम लाल, राजेंद्र, प्रकाश लाल, अमित श्रीवास्तव, केशव श्रीवास्तव, अनुराग श्रीवास्तव, रूद्रेश निगम, मनोज वर्मा, सुशीलचंद्र श्रीवास्तव, राजेश कुमार श्रीवास्तव आदि मौजूद थे। अध्यक्षता प्रकाश लाल एवं संचालन रविप्रकाश श्रीवास्तव ने किया।
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