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भतीजी की डोली को कंधा देने की हरसत रह गई अधूरी

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मनिहारी(गाजीपुर)। अपने बड़े भाई रामाश्रय राजभर की बेटी की डोली को कंधा देने की हसरत दंतेवाड़ा के शहीद अर्जुन राजभर के मन में ही रह गई। 20 जून को भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए अर्जुन ने दस दिन पहले ही ट्रेन का आरक्षित टिकट करा लिया था। उसने घर वालों से 10 जून को चलने की बात कही थी, लेकिन अर्जुन की यह हसरत अधूरी रह गई, क्योंकि अर्जुन दंतेवाड़ा में हुए बारूदी सुरंग विस्फोट में रविवार को शहीद हो गया।
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थाना क्षेत्र के बरईपारा निवासी बलिराम राजभर के पांच बेटे रामाश्रय राजभर, अमरनाथ, शिवशंकर, अर्जुन राजभर और रामकेश में से तीन बेटे रामाश्रय राजभर, अमरनाथ और शिवशंकर मुंबई में रहकर काम करते हैं। जबकि अर्जुन राजभर और रामकेश राजभर गांव में ही टेंट की दुकान चलाते थे। लेकिन देश की सेवा करने का जज्बा पाल चुके अर्जुन राजभर फौज जाने का प्रयास नहीं छोड़े और वर्ष 2014 में छत्तीसगढ़ के 16वीं बटालियन में सिपाही के पद पर तैनात हो गए। गांव में टेंट की दुकान उनके छोटे भाई रामकेश ही चला रहे थे। शहीद अर्जुन राजभर की शादी वर्ष 2000 में खुटहन उर्फ पथरा में सुनीता राजभर से हुई थी। बीते अप्रैल माह में छुट्टी लेकर घर आए अर्जुन 20 अप्रैल को अपनी पत्नी सुनीता, पुत्री कविता, बेटे अजय और अभय को लेकर छत्तीसगढ़ चले गए थे। संयोग ऐसा था कि घर से अर्जुन 20 अप्रैल को निकले और 20 मई को उनके शहीद होने की खबर घर वालों को मिली। यहीं नहीं घर में 20 जून को ही बड़े भाई रामाश्रय राजभर की बेटी की शादी थी।
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