गाजीपुर। साहित्य एकेडेमी के अध्यक्ष डा. उदयप्रताप सिंह ने पीजी कॉलेज के सभागार में डा. गजाधर शर्मा गंगेश एवं डॉ. ऋचा राय द्वारा संपादित पुस्तक का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि साहित्यकार के पास वह विलक्षण दृष्टि होती है जो पहले देखी हुई दुनिया को फिर से देखने और दिखाने के लिए आमंत्रित करती है। यह दृष्टि कथाकार रामावतार के पास है। यह पुस्तक उसकी साक्षी है।
अध्यक्षता कर रहे डा. जितेंद्रनाथ मिश्र ने कहा कि रामावतार मूलत: कथाकार हैं। उनकी सूक्ष्म दृष्टि और उर्वर कल्पना कथानक में जान डाल देती है। उन पर लिखी पुस्तक बहुत अच्छी है और रामावतार की कृति, व्यक्तित्व पर विहंगम दृष्टि डालती है। पूर्व अपर मंडलायुक्त ओम धीरज ने कहा कि रामावतार ने अपने कथा साहित्य में समकालीन यथार्थ को हर संभव आयाम में देखने और दिखाने का प्रयास किया है। बीएचयू के प्रोफेसर वशिष्ठ अनूप ने कहा कि कथाकार रामावतार ने मानव जीवन की विसंगतियों और विडंबनाओं का सुंदर चित्रांकन किया है। डॉ. विनय कुमार दुबे ने कहा कि यह पुस्तक वह आईना है जिसमें कथाकार का चित्र साफ दिखाई देता है। रश्मि शाक्य ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. समर बहादुर सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर डा. श्रीकांत पांडेय, धर्मनारायण मिश्र, डॉ. ऋचा राय, रामबदन राय, डॉ. बद्री सिंह, कनहीराम प्रजापति, डॉ. अशोक सिंह, डॉ. रामविलास यादव, प्रमोद कुमार राय, गंगा यादव, विजयनारायण यादव आदि उपस्थित थे।