गाजीपुर। जिले में बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए चलाए गया अभियान धराशायी हो गया है। इसके लिए खोले गए पोषण पुनर्वास केंद्र भी बेमतलब साबित हुए। सदर अस्पताल में दो पोषण पुनर्वास केंद्र बने हैं, लेकिन सही संचालन के अभाव में इनकी दशा दयनीय है। यहां दवा तक उपलब्ध नहीं रहती। जानकारों का कहना है कि योजनाओं को जमीनी हकीकत देने को लेकर जिम्मेदार अफसरों ने तनिक भी गंभीरता नहीं दिखाई। यही वजह रहा कि पिछले एक साल में केवल दो बार ही अभियान चलाया गया। जिसमें कुल 42 हजार बच्चे अति कुपोषित पाए गए हैं।
बच्चों को कुपोषण मुक्त रखने के लिए सरकार की ओर से कई प्रकार की योजनाएं चलाई जी रही है। शासन ने बीते 25 अगस्त से जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में पोषण मेले का भी आयोजन करने को कहा है। इसके पूर्व भी कई अभियान चल चुके हैं। बावजूद कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों की संख्या में कमी नहीं आ रही है। योजना के तहत पुष्टाहार का वितरण किया जाता है। लेकिन अधिकतर केंद्रों पर इसकी स्थिति भी पूरी तरह खराब है। बच्चों को पुष्टाहार देने के बजाय उसे बेच दिया जाता है। योजना के तहत बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से प्रीमिक्स लड्डू, मीठी तथा नमकीन दलिया दी जाती है। लेकिन यह सबकुछ कागजों पर ही चलता है। जानकारी के बाद भी अधिकारियों की ओर से गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। जिला अस्पताल में पुनर्वास केंद्र पर कुल दो चिकित्सक तथा छह स्टाफ की तैनाती की गई है।
इस संबंध में डाक्टर आरके सिन्हा ने बताया कि अभी अभियान चलाया जा रहा है। अति कुपोषित बच्चों की खोज की जा रही है, जल्द से जल्द इन पर नियंत्रण कर लिया जाएगा।