फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिले में घट रहा खेती का रकबा

विज्ञापन
विज्ञापन
गाजीपुर। अंधाधुंध जमीनों की प्लाटिंग, बढ़ते शहरीकरण के चलते खेत खत्म होते जा रहे हैं। खेती का रकबा हर साल सिकुड़ता जा रहा है। जिला प्रशासन की उदासीनता का नतीजा है कि जनपद में खेती की जमीन तेजी से घट रही है। इसके लिए बढ़ रही आबादी और विकसित हो रही नई कालोनियां भी महत्वपूर्ण हैं। इतना ही नहीं एनएच, फोरलेन से लेकर गांवों को जोड़ने वाली सड़कें भी खेतों की उपयोगिता को कम कर रही हैं। आने वाले समय में खेती कम होने से अन्न का संकट गहरा सकता है। देखा जाए तो हर साल कृ षि योग्य भूमि का रकबा घट रहा है। किसान भी पैसे की लालच में अपनी जमीनों को बेंच रहे हैं। अगर किसान जागरूक नहीं हुए तो आने वाले समय में अनाज तो मंहगा होगा ही खाने के भी लाले पड़ जाएंगे।
विज्ञापन

विकास के दौर में खेती योग्य जमीनों की खरीद-फरोख्त अच्छी आमदनी का श्रोत बन गया है। समय के साथ बढ़ती जमीन के दामों एवं इससे होने वाली करोड़ों रुपये की आमदनी के चलते हर क्षेत्र में कृषि योग्य भूमि पर प्लाटिंग होने लगी है। इस कार्य में लगे प्रापर्टी डीलरों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। इस काम में नियमों को भी ताक पर रख दिया गया है। वर्तमान समय में जिले में रबी की फसल के लिए दो लाख दस हजार 966 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है। इसी प्रकार खरीफ की फसल के लिए एक लाख 91 हजार 852 हेक्टेयर और जायद की फसलों के लिए 6346 हेक्टेयर खेती लायक जमीन है।
कृषि विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो खेती का रकबा लगातार कम होता जा रहा है। हर वर्ष सड़क, मकान, कामर्शियल प्रयोग आदि को लेकर खेती की जमीनों को प्रयोग में लाया जा रहा है। जमीन बिकने की यही रफ्तार रही और कृषि योग्य भूमि का प्रयोग आबादी, उद्योग और सड़कों के विकास में किया जाता रहा, तो आने वाले दिनों में किसान नाममात्र के रह जाएंगें और अनाज का संकट खड़ा हो जाएगा। उप निदेशक कृषि यूपी सिंह ने बताया कि कृषि योग्य जमीन लगातार कम हो रही है। कुछ सड़क निर्माण, कुछ भवन निर्माण तो कुछ नहर निर्माण आदि में गई है। इस समस्या को दूर करने के लिए किसानों को जागरूक होना पड़ेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें