मुहम्मदाबाद (गाजीपुर)। स्थानीय विकासखंड के सभी सहकारी समितियों में डीएपी खाद न होने से परेशान किसान डीएपी के लिए सहकारी समितियों का चक्कर लगा रहे हैं। डीएपी न मिलने से आलू की बुआई भी पिछड़ रही है।
मुहम्मदाबाद तहसील क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आलू की खेती होती है लेकिन बुआई के सीजन में ही इस वर्ष सहकारी समितियों में डीएपी के अभाव के कारण किसानों को काफी असुविधा हो रही है। किसान प्रतिदिन डीएपी के लिए सहकारी समितियों का चक्कर लगे रहे हैं। जिन किसानों का खेत बुआई के लिए तैयार हैं उन्हें मजबूरन अधिक मूल्य पर प्राइवेट उर्वरक विक्रेताओं के यहां से डीएपी लेनी पड़ रही है। प्राइवेट दुकानों पर मिलावटी खाद बेचे जाने के डर से सहमे किसान प्राइवेट दुकानों से डीएपी जैसी महंगी खाद ले जाकर खेतों में डालने में हिचक रहे हैं। वजह अगर डीएपी नकली मिल गई तो उनकी पूरे वर्ष की मेहनत खराब हो जाएगी और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। सहायक विकास अधिकारी सहकारिता जेपी त्रिपाठी ने कहा कि जिला मुख्यालय पर डीएपी उपलब्ध न होने के कारण सहकारी समितियों पर नहीं पहुंच रही है। डीएपी की रैक आने वाली है। रैक आते ही सहकारी समितियों पर डीएपी उपलब्ध हो जाएगी। पिछले तीन वर्ष से आलू उत्पादक किसानों को आलू का भाव नहीं मिलने से काफी आर्थिक क्षति पहुंची है। इस वर्ष शुरू से ही आलू का भाव न बढ़ने से किसान अपना भंडारित आलू नहीं बेच सके। अब अंतिम समय में आलू को कोई भाव न होने से किसानों ने कोल्ड स्टोरेज में रखा अपना आलू छोड़ दिया है। कोल्ड स्टोरेज संचालकों ने किसानों से अपना आलू 30 नवंबर तक निकाल लेने को कहा है। किसानों का कहना है कि आलू का भाव कोल्ड स्टोरेज के किराया के बराबर भी न मिलने के कारण वह आलू निकाल पाने में असमर्थ हैं। अभी भी लगभग सभी कोल्ड स्टोरेजों में 10 से 15 हजार पैकेट तक आलू पड़ा हुआ है। कोल्ड स्टोरेज मालिक को भी किसानों द्वारा आलू नहीं निकाले जाने से उसका किराया न मिलने से घाटा उठाना पड़ रहा है। इतने बडे पैमाने पर स्टोरेज में बचे हुए आलू को वह कहां ले जाए उनके सामने समस्या है।