देवकली। स्थानीय ब्रह्मस्थल परिसर में चल रहे मानस सम्मेलन के चौथे दिन शुक्रवार को प्रवचन करते हुए मानस भूषण नीरज शास्त्री ने कहा कि हिमालय एवं सागर की गहराई एवं ऊंचाई को नापा जा सकता है लेकिन मां के प्यार एवं सेवा को नहीं नापा जा सकता है। वर्तमान परिवेश में मां-बाप उपेक्षित हैं, फिरभी अपने बालक को दु:खी नहीं देखना चाहते। भाभी मां के समान है।
भदोही से आए हुए आचार्य रविंद्रनाथ पांडेय ने कहा कि चौरासी लाख योनियों में भटकने के बाद जीव को मानव तन मिलता है जो देवताओं को भी दुर्लभ है। गंगा मां है, उसको पवित्र रखना प्रत्येक मानव का धर्म है। बक्सर से आए हुए रामचंद्राचार्य महाराज ने कहा कि आज के विषाक्त वातावरण में मानव अपने दु:ख से दु:खी नहीं है दूसरे के सुख से दु:खी है। जीवन में सुख, शांति एवं परमानंद को प्राप्त करने के लिए भक्ति का सहारा लेना होगा, जो सत्संग एवं संत से मिलता है। मानव तन कर्मयोनी है जैसा कर्म करोगे वैसा फल भुगतना होगा। प्रवचन के कार्यक्रम में रमाशंकर पांडेय, रामसुधार पांडेय आदि ने भाग लिया। संचालन अरविंदलाल श्रीवास्तव ने किया।