फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खुले में शौच कर स्वच्छता अभियान का उड़ा रहे माखौल

विज्ञापन
विज्ञापन
गाजीपुर/जमानिया। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले के अधिकांश गांव ओडीएफ मुक्त घोषित किए जा चुके हैं। इसके लिए टीम गठित कर महीनों अभियान चलाया गया है। जिले के कुर्था गांव को प्रथम खुले में शौच मुक्त गांव घोषित किया गया था। जनपद में कुल शौचालय बनाने का लक्ष्य तीन लाख 50 हजार नौ सौ था। जिसमें से अब तक केवल एक लाख 13 हजार शौचालय बनाए गए हैं। बाकी बचे शौचालयों का निर्माण जिला प्रशासन द्वारा आगामी 31 दिसंबर तक पूरा करने का दावा किया जा रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि अभी भी हजारों शौचालय का निर्माण कार्य तक शुरू नहीं हुआ है। हकीकत यही है कि गांव की बड़ी आबादी खुले में शौच कर रही है और स्वच्छता अभियान का माखौल उड़ा रही है। कागजों पर तो गांवों को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है, लेकिन हकीकत यह है कि ऐसे गांवों में जरूरत के मुताबिक शौचालय नहीं बने हैं।
विज्ञापन

जमानिया विकास खंड पर एक नजर डालें तो 30611 आवेदकों का चयन शौचालय निर्माण के लिए किया गया है। जिसके सापेक्ष शासन से 23901 शौचालय निर्माण के लिए शासन से 28 करोड़ 68 लाख 12 हजार रुपये आ चुके हैं। जिसमें से 18831 लोगों ने अपने शौचालय का निर्माण पूर्ण करा लिया है और 22 करोड 59 लाख 72 हजार रुपये खर्च किए जा चुके हैं। जबकि 696 शौचालय निर्माण का कार्य अभी अधूरा है। विकास खंड में 11550 लोगों ने अब तक निर्माण कार्य शुरू ही नहीं कराया है। इसके विकास खंड को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है। आलम यह है कि आज भी बड़ी आबादी खुले में शौच करने के लिए मजबूर है। प्रत्येक गांव में खुले में शौच को रोकने के लिए निगरानी टीम का गठन भी किया गया है, लेकिन यह निगरानी टीम अपने दायित्वों का निर्वहन ठीक से नहीं कर पा रही है। जिस कारण से खुले में शौच बदस्तूर जारी है। विकास खंड के सभी गांवों को ओडीएफ करार दिया गया है, लेकिन हकीकत यही है कि गांव की एक बड़ी आबादी खुले में शौच करने को विवश है और शौचालय मात्र शो-पीस बने हुए हैं। क्षेत्र के हेतिमपुर, हमीदपुर, बघरी, कटहरा, रामपुर -सलेमपुर, ढढनी, महली, देवरियां, रामपुर फुफुआंव, रायपुर, सोनहरिया, शाहपुर, नाथुपुर, शेरपुर आदि गांव जाने वाले मुख्य मार्ग के दोनों तरफ स्वच्छ भारत मिशन की हवा प्रति दिन निकाली जा रही है। कागजों पर सभी गांवों को खुले में शौच मुक्त कर दिया गया है। इतना ही नहीं क्षेत्र में ऐसे भी लोग है, जहां मानिंदों को शौचालय दे दिया गया है। जिसकी वजह से पात्र लोग खुले में शौच करने के लिए बाध्य हैं। मुहम्मादाबाद तहसील में 1609 शौचालय बनाए जाने का दावा किया जा रहा, इसके लिए एक करोड़, 93 लाख आठ हजार रुपये भी खर्च किए गए हैं, लेकिन इनमें से अब भी कई शौचालय पर कार्य शुरू नहीं हुआ है। यही हाल अन्य तहसीलों का है।

गांवों को खुले में शौचमुक्त करने और गंदगी से होने वाली बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करने के तमाम दावे किए जाते हैं, लेकिन शायद यह सब कुछ कागजों पर ही हो रहा है। यही कारण है कि खुले में शौच रुक नही रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें