गाजीपुर। परिषदीय विद्यालयों की दशा सुधारने के लिए सरकार तरह-तरह की पहल कर रही है, लेकिन अभी इसका खास असर देखने को नहीं मिल रहा है। प्राथमिक स्कूलों में बैठने की समुचित व्यवस्था तक नहीं है। स्कूलों में पेयजल और शौचालय की समस्या दिनों दिन गंभीर होती जा रही है। आलम यह है कि 32 फीसदी स्कूलों में शौचालय नहीं है, तो 25 फीसदी में पेयजल की दिक्कत है। जनपद के कुल 2755 प्राथमिक विद्यालयों में से 884 में शौचालय नहीं है। बहुत विद्यालयों में शौचालय है, लेकिन वह मरम्मत के अभाव में उपयोग के लायक नहीं है। ऐसे में छात्र किसी तरह बाहर चले जाते हैं, लेकिन सबसे अधिक परेशानी छात्राओं को होती है। विभाग की माने तो इन दिनों 640 स्कूलों में हैंडपंप खराब हैं। स्कूल जाने वाले अधिकतर छात्र घर से पानी भी साथ लाते हैं।
जिलेभर में 1953 प्राथमिक तथा 802 उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित होते हैं। जिसमें 760 शौचालय ऐसे हैं, जो खराब हैं और प्रयोग के लायक नहीं है। सबसे आश्चर्य की बात यह है कि एक ओर सरकार जहां घर-घर शौचालय की बात कर रही है, वहीं 124 स्कूलों में तो शौचालय ही नहीं हैं। इसी प्रकार 98 विद्यालय ऐसे चिह्नित किए गए हैं, जिसके आसपास जबर्दस्त गंदगी है। स्कूलों में आ रही बदबू से बच्चें पढ़ नहीं पाते हैं, वहीं संक्रामक रोगों का खतरा हमेशा बना रहता है। पेयजल की बात करें, तो यह समस्या भी गंभीर है। 294 स्कूलों के हैंडपंप मामूली खराबी के कारण पानी नहीं दे रहे हैं। जबकि 392 हैंडपंप तो पूरी तरह से खराब हैं। 54 स्कूल हैंडपंप विहीन हैं। यहां के छात्रों को पानी तक नसीब नहीं होता। मिड डे मील खाने के बाद छात्रों को काफी परेशानी होती है। उन्हें या तो घर से पानी लाना पड़ता है अथवा फिर आसपास भटकना पड़ता है। हाल ही में सभी स्कूल खुल गए हैं। अगर आलम यही रहा तो बच्चों की पढ़ाई का दावा कितना सही साबित होगा यह वक्त ही बताएगा।
जमानिया संवाददाता के मुताबिक क्षेत्र के अधिकतर प्राथमिक विद्यालयों के भवन जर्जर हैं। तहसील में स्थित प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शौचालयों की दशा भी बेहद दयनीय है। शौचालयों में कूड़ा आदि भरा पड़ा है। विकास खंड के हेतिमपुर, पचोखर, बघरी, बेटाबर आदि प्राथमिक विद्यालय तथा उच्य प्राथमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को खुले में शौच जाना पड़ रहा है। कहीं-कहीं शौचालय तो बनाया गया है, लेकिन वह पूरी तरह से खंडहर हो गया है। यहां के स्कूलों में भी स्वच्छ भारत अभियान का असर नहीं दिखाई दे रहा है। खंड शिक्षा अधिकारी धनपद यादव ने बताया कि ग्राम विकास विभाग के स्तर से साफ-सफाई के लिए टीम गठित कर दी गई है। इसकी निगरानी के लिए पंचायत स्तर पर भी अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। जिन जगहों पर शौचालय का निर्माण अब तक नहीं हुआ है। उन जगहों का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। जिन जगहों पर शौचालय क्षतिग्रस्त हैं, वहां पंचायत विभाग से मरम्मत कार्य जल्द करा दिया जाएगा।
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कटान पीड़ितों का शरणालय बना प्राथमिक विद्यालय
मुहम्मदाबाद। नगर के प्राथमिक विद्यालय के मुख्य द्वार से लेकर परिसर तक सेमरा कटान के पीड़ितों का लंबे समय से कब्जा है। बच्चे जब स्कूल में प्रवेश करते हैं, तो उन्हें लगता है कि किसी के घर में प्रवेश कर रहे हैं। यहां के उच्च प्राथमिक विद्यालय में तीन हैंडपंप हैं और सभी खराब हैं। बच्चों को पानी के लिए भी भटकना पड़ता है। प्राथमिक विद्यालय सेमरा तो पूरी तरह से कटान पीड़ितों का शिविर बना हुआ है। यहां बच्चों की पढ़ाई कागज पर ही चल रही है। कटान के बाद से बेघर हुए लोगों को सरकार समुचित आवास उपलब्ध नहीं करा पा रही है। वह इधर-उधर शिविरों में बंजारों की तरह अपना जीवन बीता रहे हैं।
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शौचालय तो हैं, लेकिन उपयोग के लायक नहीं
भीमापार। शिक्षा क्षेत्र सादात के परिषदीय विद्यालयों के शौचालयों की स्थिति बहुत ही दयनीय है। कई विद्यालयों में शौचालय बने हैं, लेकिन उपयोग करने लायक नहीं है। प्राथमिक विद्यालय भीमापार शौचालय के अंदर टुकड़े भरे हैं। गंदगी का आलम यह है कि मजबूर होकर विद्यालय की छात्राओं तथा अध्यापिकाओं को भी खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। यही हाल उच्च प्राथमिक विद्यालय अताउल्लाहपुर, प्राथमिक विद्यालय मंगारी, पचई पट्टी आदि का है। इसी प्रकार प्राथमिक विद्यालय घूरेपुर, मंगारी, जगदीशपुर के हैंडपंप पूरी तरह से गंदा और दूषित पानी दे रहे हैं।
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जिन विद्यालयों में हैंडपंप खराब है उसकी सूचना जलनिगम और जिसमें शौचालयों खराब हैं उसके लिए डीपीआरओ को लिखित सूचना भेजी जा चुकी है। इस पर गंभीरता से काम हो रहा है और जल्द ही सभी शिकायतों को दूर कर लिया जाएगा। प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शौचालय निर्माण एवं मरम्मत का कार्य तेजी से चल रहा है। - शमशेर आलम, जिला समन्वयक निर्माण।