गाजीपुर। धान के उत्पादन में जिला अग्रणी है। पूरे जिले में किसान व्यापक मात्रा में धान की खेती पर जोर दे रहे हैं। मोटे दाने के साथ ही पतले और महीन चावल के लिए धान की नर्सरी डाली जा रही है। गंगा पार के इलाके में पानी की उपलब्धता के चलते कम अवधि वाले धान को एवं अन्य इलाकों में लंबी अवधि में तैयार होने वाले बीज बोए जाते हैं। जिले में सरकारी बीज की दुकान के अलावा खुले में महीन दाने वाली धान की बीज की बिक्री अधिक है। सरकारी बीज करिश्मा प्रजाति को सबसे बेहतरीन बताया जा रहा है।
जिले में करीब 156.629 हेक्टेयर में धान की खेती हो रही है। हालांकि समुचित बारिश न होने से खेती पिछड़ रही है। इसके बाद भी धान की नर्सरी डाले जाने का काम भी तेजी से शुरू हो गया है। राजकीय कृषि निवेश केंद्र के अलावा खुले बाजार से भी किसान बीज खरीद रहे हैं। इस समय बाजार में नाटी मंसूरी, सांभा, स्वर्णा, कतरनी, श्रीराम भोग आदि प्रजातियों के बीज उपलब्ध है। इसमें कुछ मोटे दाने के तो कुछ पतले और महीन दाने के चावल वाले है। सरकारी केंद्रों पर इस बार नरेंद्रदेव कृषि विश्वविद्यालय फैजाबाद के शोधित धान के बीज की प्रजातियों का वितरण हो रहा है। इन केंद्रों पर एनडीआर 1045-2, एनडीआर 2065 आदि प्रजातियां उपलब्ध हैं। इसके साथ ही हाईब्रिड में पायनियर की 27पी 63 और बायर की 6444 गोल्ड को भी किसान पसंद कर रहे हैं। सबसे बेहतरीन नूजू विड की करिश्मा प्रजाति को बताया जा रहा है। सरकारी खरीद पर किसानों को सब्सिडी भी दी जा रही है। बीज की पूरी मांग को सरकारी केंद्र पूरा नही कर पाते। सरकारी केंद्रों पर मन मुताबिक बीज नहीं मिल रहा है जिससे किसान भटक रहे हैं। परिणाम स्वरूप किसानों को खुले बाजारों से महंगे दर पर ही बीज खरीदना पड़ रहा है। धान की नर्सरी डालने का काम 25 मई से ही शुरू हो जाता है। इस बार बरसात की कमी से अब तक यह काम जोर नहीं पकड़ पाया है। उप निदेशक कृषि यूपी सिंह ने बताया कि किसान महीन चावल के बीज को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।