कासिमाबाद (गाजीपुर)। तेल के आभाव में पांच दिनों से सरकारी एम्बुलेंस सेवा ठप है। देखा जाए तो मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए चलाई गई आपातकालीन सेवा इन दिनों बेपटरी हो गई है। संचालित 108 और 102 एंबुुुलेंसों की सेवा बंद होने के चलते मरीजों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। निजी वाहन भाड़े पर बुक कराने पर मरीजों से मुंह मांगा संचालक द्वारा पैसा लिया जा रहा है। एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को सरकारी अस्पताल पहुंचने के लिए काफी जद्दो-जहद करना पड़ रहा है।
प्रदेश की पिछली सपा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को तत्काल चिकित्सकीय सेवा पहुंचाने के लिए सरकारी 108 नंबर की एंबुलेंस सेवा की शुुरूआत की गई थी। साथ ही केंद्र सरकार की ओर से गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए सरकारी अस्पताल पहुंचाने तथा प्रसव के बाद घर तक पहुंचने के 102 नंबर की एंबुलेंस सेवा की शुरूआत की गई थी। मंगलवार को बदरपुर चांद निवासी राजीव राम की गर्भवती पत्नी रूबी देवी को प्रसव पीड़ा होने के बाद उनके परिजनों ने 102 नंबर पर कॉल करके इसकी जानकारी दी। कॉल करने पर उन्हें बताया गया कि 102 नंबर की एंबुलेंस तेल के आभाव में सीएचसी पर पांच दिन से खड़ी है। इस लिए एंबुलेंस की सेवा उपल्ब्ध नहीं हो पाएगी। इसके बाद विवाहिता के पिता रामाशीष राम ने प्राइवेट वाहन भाड़े पर लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। उन्होंने अस्पताल के नर्सों पर आरोप लगाते हुए बताया कि सभी दवाइयां बाहर से मंगवाई गई। वहीं प्रसव के बाद जबरदस्ती पैसा भी लिया गया। इस संबंध में प्रभारी चिकित्सा अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि केंद्र पर अगर स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ शिकायत मिली है तो सख्त कार्रवाई होगी। बताया कि एंबुलेंस तीन अगस्त से तेल के अभाव में खड़ी है। इस संबंध में नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. डीपी सिन्हा ने बताया कि तेल आ चुका है। अब सेवा पूर्ण रुप से बहाल कर दी गई है। जनपद में 102 एंबुलेंस की संख्या 42 और 108 एंबुलेंस की संख्या 27 है।