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समाज में फैली कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष करने का लिया संकल्प

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गाजीपुर। कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 137वीं जयंती रविवार को समारोहपूर्वक मनाई गई। जिला कायस्थ समन्वय समिति के तत्वावधान में सरजू पांडेय पार्क में आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए समाज में फैली कुरीतियों एवं अव्यवस्था के खिलाफ संघर्ष करने का संकल्प लिया।
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गोष्ठी में मुख्य वक्ता कांग्रेस के जिलाध्यक्ष डा. मारकंडेय सिंह ने मुंशी प्रेमचंद को सरलता, सहजता और उदारता की प्रतिमूर्ति बताया। कहा कि वह मात्र साहित्यकार ही नहीं थे बल्कि वह महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थे। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रामधारी यादव ने कहा कि वह एक यथार्थवादी एवं प्रगतिशील लेखक थे। वह समाज की अव्यवस्था के खिलाफ अलख जगाते रहे। गोष्ठी में भाजपा नेता सुरेशचंद्र श्रीवास्तव, जितेंद्र घोष, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष अंबिका प्रसाद दुबे, रविकांत राय, राजेश कुशवाहा, प्रमोद श्रीवास्तव, अजय श्रीवास्तव, पप्पू श्रीवास्तव, संतोष श्रीवास्तव, शिवशंकर सिन्हा, बालेश्वरनाथ वर्मा, सदानंद यादव आदि उपस्थित थे। अध्यक्षता मुक्तेशवर प्रसाद श्रीवास्तव एवं संचालन अरुण कुमार श्रीवास्तव ने किया। वेलफेयर क्लब के तत्वावधान में मुंशी प्रेमचंद की 137वी जयंती पर गोराबाजार स्थित विद्यालय पर आयोजित गोष्ठी में मुख्य अतिथि डा. देवप्रकाश राय ने कहा कि वह ऐसे कालजयी उपन्यासकार थे, जिन्होंने अपनी लेखनी के दम पर पूरे विश्व में पहचान बनाई। अध्यक्षता कर रहे संस्था के अध्यक्ष डा. शरद कुमार वर्मा ने कहा कि कथा सम्राट ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज की कुरीतियों पर कड़ा प्रहार किया था। महासचिव सिद्धार्थ मालवीय ने कहा कि प्रेमचंद बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। इस अवसर पर क्लब उपाध्यक्ष धीरेंद्र त्रिपाठी, चंद्रिका प्रसाद, पवन कुमार पांडेय, डा. जितेंद्र कुमार, मनोज दूबे, अजय यादव, प्रमोद बिंद, ब्रजेश श्रीवास्तव, राहुल प्रताप मिश्र, राजेंद्र प्रताप तिवारी आदि उपस्थित थे। औड़िहार संवाददाता के अनुसार साहित्यिक संस्था नवोदय के तत्वावधान में प्रेमचंद एवं उनकी औपन्यासिक दृष्टि विषयक संगोष्ठी में मुख्य वक्ता प्रो. छोटेलाल मिश्र ने कहा कि प्रेमचंद के उपन्यासों में समाज के प्रति गहरी संवेदना है। डा. मायाराम शुक्ल ने कहा कि प्रेमचंद स्वयं में एक आंदोलन थे। उन्होंने सोते समाज को जगाने और सचेत करने का कार्य किया। डा. कमलनयन ने कहा कि प्रेम के नाम पर नारी का शोषण और समाज में हो रहे अवमूल्यन पर लेखनी चलाकर प्रेमचंद ने अपनी महानता सिद्ध की है। गोष्ठी में भावना पांडेय, डा. विजेंद्र एवं महातिम सिंह ने विचार व्यक्त किया।
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