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शासन की मंशा बता भरी जा रही जेब

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गाजीपुर। ताड़ीघाट-बारा मार्ग इन दिनों अवैध वसूली का अड्डा बन गया है। जिले में वन क्षेत्र न होने के बाद भी वन विभाग की ओर से सुहवल थाना अंतर्गत शिवाला के पास बालू लदे ट्रकों से अवैध वसूली की जा रही है। प्रदेश के 35 जिलों में इसी मार्ग से होकर बालू लदे ट्रक हजारों की संख्या में प्रत्येक दिन गुजरते हैं। इन ट्रकों से वन विभाग के शमन शुल्क के रूप से एक हजार से लेकर 1500 रुपये वसूले जाते हैं। सबसे खास बात यह है कि वनाधिकारी इस वसूली को शासन की मंशा बता कर अपनी और अधिकारियों की जेब भर रहे हैं।
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गहमर थाना क्षेत्र के करहिया गांव के बाहर ताड़ीघाट-बारा मार्ग पर कई सालों से वन विभाग की ओर से चेक पोस्ट बनाया गया था। बिहार प्रांत से आने वाले कोयला और लकड़ी लदे ट्रकों से 200 रुपये शमन शुल्क वसूलने का काम किया जाता था। लेकिन ग्रामीणों द्वारा विवाद होने के बाद वन विभाग के सभी कर्मचारी अपना बोरिया-बिस्तर लेकर रेवतीपुर आ गए। रेवतीपुर में भी विवाद होने के बाद सुहवल थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष प्रवीण यादव से तालमेल बैठाकर शिवाला पर बैठकर शमन शुल्क के नाम पर वसूली करने लगे। बिहार प्रांत के बक्सर जिले से प्रदेश को जोड़ने वाली गंगा नदी पर बने पुल के क्षतिग्रस्त हो जाने से कई वर्षों पहले बंद कर दिया गया। इसके बाद बालू खनन भी प्रदेश में बंद हो गया। प्रदेश में खनन बंद होने के बाद बालू के लिए ट्रकों बिहार प्रांत जाने के लिए ताड़ीघाट-बारा मार्ग होकर जाना पड़ता है। बालू लदे ट्रकों द्वारा बिहार में ही टैक्स दे दिया जाता है। इसके बाद जनपद में प्रवेश करते ही वन विभाग की ओर से इन ट्रकों से माटी वसूली की जा रही है। यहीं नहीं वसूली तो शमन शुल्क के नाम पर की जाती है, लेकिन को पर्ची उपलब्ध नहीं कराई जाती है। इस वसूली को लेकर ट्रक संचालकों ने डीएम से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की थी। डीएम ने गंभीरता पूर्वक लेते हुए वसूली पर रोक लगाने का आश्वासन भी दिया था। इसके बावजूद भी इन ट्रकों से अवैध वूसली जारी है। इस संबंध में डीएफओ एचराजा मोहन ने बताया कि वन विभाग द्वारा परिवहन शुल्क और चेकिंग के नाम शमन शुल्क लिया जाता है। जबकि यह शमन शुल्क रेवन्यू में जमा नहीं होता है। यह पैसा वन विभाग के बैंक खाते में जमा किया जाता है। बालू भी वन क्षेत्राधिकार में ही आता है।
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