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अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही गंगा

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सैदपुर (गाजीपुर)। गंगा मुक्ति दायिनी के रूप में वैदिक और धार्मिक ग्रंथों में उल्लिखित है। जीवन से जीवनोपरांत मुक्ति का महत्वपूर्ण साधन मानी जाने वाली गंगा अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। गंगा का अस्तित्व खोना भारतीय संस्कृति और समाज दोनों के लिए खतरनाक है। यह बातें रविवार को गंगा संरक्षण और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना के लिए संघर्षरत विशाल सेवा संघ की ओर से चलाए जा रहे धरना प्रदर्शन के 13वें कार्यक्रम में अधिवक्ता अवनीश चौबे ने कही।
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उन्होंने कहा कि इसमें आम जागरूकता अति आवश्यक है। आप के द्वारा अपने दरवाजे की नाली में डाला गया कूड़ा, प्लास्टिक के दोने-पत्तल, अन्य कचरा सीधे गंगा में पहुंचता है। तमाम लोगों द्वारा अपने कमरों, दूकानों की सफाई कर कूड़ा सीधे नाली में गिरा दिया जाता है। ऐसा करते समय आप लोगों द्वारा गंगा की छवि को भुला दिया जाता है। कहा कि आम जन की जागरूकता से गंगा पुन: अपने पुराने स्वरूप में लाई जा सकती है। आज की स्थिति में पुन: भगीरथ की जरूरत आ पड़ी है। कर्यक्रम के इस सप्ताह के संयोजन की जिम्मेदारी राइजिंग यूथ सामाजिक संस्था ने ली थी। आज सुबह 7 बजे अवनीश, राघवेंद्र मिश्र, पक्काघाट के साजन सिंह, सूरज भारती, दरोगा कश्यप के साथ मिलकर गंगा की तलहटी से प्लास्टिक कचरा, दोने, शैंपू, साबुन के पाउच आदि को बटोरकर बाहर निकाला। कार्यक्रम में सूरज दुबे, राहुल शर्मा, प्रीतम कनौजिया, गिरीश पांडेय, धर्मेंद्र कुमार, मोती, अरुण सोनकर, विनय यादव, वर्चस्व पांडेय आदि मौजूद थे।
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