सामाजिक वानिकी और नमामि गंगे के साझा प्रयास से जौहरगंज से पटना के बीच गंगा के दोनों किनारों पर हरित पट्टी विकसित की जाएगी। दोनों गांवों के बीच इस योजना के तहत क्षेत्र में 5000 पेड़ों लगाए जाएंगे। पौराणिक वाराह स्थल एवं कबीर के आध्यात्मिक गुरू रामानंद की मठिया की भी सूरत बदलेगी। अब तक 3000 गड्ढों की खुदाई कराई जा चुकी है।
गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए चलाई जा रही केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना के तहत गाजीपुर जनपद में सामाजिक वानिकी की मदद से हरी पट्टी विकसित की जाएगी। जौहरंगज से कैथी होते हुए वाराणसी जाने वाली सड़क का अब इस्तेमाल नहीं होता है। इसके सड़क के किनारे सामाजिक वानिकी सैदपुर प्रखंड द्वारा हरित पट्टी के रूप में विकसित करने की योजना है।
इस क्रम में जौहरगंज से पटना गांव तक सड़क के दोनों किनारों पर लगभग डेढ़ किमी की चौड़ाई में पौधरोपण किया जाएगा। वन विभाग के इस योजना से पर्यावरण संतुलन होगा। इससे क्षेत्रीय जनता में प्रसन्नता व्याप्त है। पटना और औड़िहार के ग्राम प्रधान ने रविवार को क्षेत्रीय वनाधिकारी से मिलकर इस परियोजना में सहयोग की स्वीकृति दी।
औड़िहार के वाराह स्थल एवं घाट तथा पटना ग्राम सभा में गंगा किनारे स्थित रामानंद की मठिया को भी इस परियोजना से जोड़ने का अनुरोध किया। रेंजर जेपी राय ने अपनी टीम और पटना गांव के प्रधान प्रतिनिधि दयानंद यादव, औड़िहार प्रधान प्रतिनिधि राजन सिंह के साथ मठिया और वाराह स्थल का निरीक्षण किया।
वन विभाग के इस परियोजना से लंबे समय से उपेक्षित सड़क के दोनों तरफ की जमीनों के उपयोग के साथ औड़िहार के पास तेजी से हो रहे गंगा के कटान पर भी लगाम लगने की उम्मीद बन गई है। मिला-जुलाकर जल्द ही औड़िहार से पटना गांव के गंगा किनारे का क्षेत्र हरे-भरे पेड़ों से लह लहाएगा और पशु-पक्षी, मानव के लिए जीवन उपयोगी आधार उपलब्ध कराने के साथ ही गंगा के निर्मलीकरण के प्रयास में बेहतर संसाधन उपलब्ध करायेगा।