गाजीपुर। जिले में करंट से हर महीने आठ लोगों की जान गई है। बीते छह महीन में 47 लोगों की करंट से मौत हुई है। मरने वालों में 25 से 40 वर्ष के लोग अधिक है। घरेलू बिजली जैसे प्लग लगाते समय, पंखा ठीक करते समय या सबमर्सिबल चालू करते समय करंट की चपेट में आए।
घरेलू कनेक्शन में थोड़ी परेशानी पर ग्रामीण बिना प्रशिक्षण और बिना सावधानी बरते खराब पंखे, बोर्ड में प्लग लगाने तो कभी सबमर्सिबल का तार दुरुस्त करते रहते हैं। यहीं नहीं बिना सुरक्षा किट के कई बार बिजली के खंभों पर तार जोड़ते हैं। ऐसे में करंट की चपेट में आने से हादसे का शिकार हो जाते हैं। आंकड़ों के मुताबिक सबसे अधिक घटनाएं घरेलू बिजली ठीक करते समय हुई है। मुहम्मद अल्ताफ ने बताया कि घरेलू बिजली बिना सुरक्षा उपकरणों के ठीक करते समय नासमझी में लोगों की मौत हो जाती है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि बिजली निगम के अधिकारियों एवं कर्मियों द्वारा सिर्फ बिजली का बिल ही वसूला जाता है। इस तरह की हो रही घटनाओं की रोकथाम के लिए जमीनी स्तर पर कोई जागरूकता अभियान शायद ही कभी चलाया जाता है। राकेश शर्मा ने बताया कि घरेलू बिजली ही नहीं जर्जर तारों के टूटकर खेतों और खलिहानों में गिरने के अलावा छुट्टा पशुओं से फसलों को बचाने के लिए लगाए जाने वाले झटका मशीन से भी कई बार दुर्घटना हुई है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि मौके पर बिजली निगम के जिम्मेदार सिर्फ आश्वासन देते हैं, लेकिन बाद में पल्ला झाड़ लेते हैं। ऐसे में लोगों को भी जागरूक होना पड़ेगा कि घर पर बिजली संबंधित कोई कार्य करते समय सुरक्षा किट का प्रयोग जरूर किया जाए। पोस्टमार्टम प्रभारी डा. मनीष कुमार ने बताया कि एक जनवरी से अबतक करंट की चपेट में आने से मृत 47 लोगों का पोस्टमार्टम कराया गया है।