फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

...और ग्रामीणों ने रुकवाया रेल ब्रिज का काम

विज्ञापन
विज्ञापन
सुहवल। गंगा नदी पर बन रहे रेल कम रोड ब्रिज के निर्माण कार्य को शनिवार को मेदनीपुर गांव के आस-पास के किसानों, काश्तकारों ने रोकवा दिया। वह सभी अधिग्रहीत की गई जमीन का अभी तक मुआवजा न मिलने का आरोप लगा रहे थे। इसके चलते निर्माण कार्य पूरी तरह से ठप हो गया। कार्यदायी संस्था ने इसकी जानकारी जिलाधिकारी एवं रेलवे के अधिकारियों को दी है।
विज्ञापन

परियोजना के तहत जोर-शोर से काम चल रहा है। इस समय सेफ्टी प्वाइंट के लिए बोल्डर, पिंचिग का काम भी जारी था। ट्रकों से भारी संख्या में बोल्डर आने की जानकारी होने पर आज दोपहर दर्जनों ग्रामीण निर्माण कार्य के साइड प्लांट पर पहुंच गए। सभी ने निर्माण कार्य को यह कहते हुए रोकवा दिया कि उनके जमीन का मुआवजा जब तक पूरी तरह से नहीं मिल जाता है, तब तक अब वह किसी तरह का निर्माण कार्य नहीं होने देगें। मौके पर पहुंचे आरवीएनएल एवं कार्यदायी संस्था के अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया कि वह उनकी मांगों को जल्द ही उच्चाधिकारियों तक पहुंचा देंगे लेकिन किसान अपनी जिद पर अड़े रहे। बाद में काम को रोक दिया गया। प्रोजेक्ट मैनेजर अमनदीप गोयल ने बताया कुछ किसानों ने उनकी भूमि का मुआवजा नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए काम बंद करा दिया है। जिलाधिकारी सहित रेलवे तथा अन्य विभागों को किसानों की समस्याओं से अवगत करा दिया गया है। जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान कर दिया जायेगा।

दो फेज में पूरी होगी 1766 करोड़ की परियोजना
गाजीपुर। रेल कम रोड ब्रिज का निर्माण पिछले दो वर्षों से जारी है। ताड़ीघाट-मऊ रेल खंड की 51 किमी लंम्बी इस बहुप्रतिक्षित परियोजना की कुल लागत करीब 1766 करोड़ है। इसका निर्माण दो फेज में होना है। पहले फेज में सोनवल, ताड़ीघाट से गाजीपुर सिटी स्टेशन, गाजीपुर घाट तक का निर्माण कार्य जारी है। इसमें गंगा नदी पर रेल कम रोड ब्रिज का निर्माण, सोनवल के पास नए रेलवे स्टेशन का काम भी चल रहा है। पहले फेज में कुल 17 गांव के किसानों की जमीन अधिग्रहित किया गया था। इसमें जमानियां तहसील एवं सदर तहसील के क्रमश: सात और दस गांवों के सैकड़ों किसानों की कई सौ बिगहे जमीन में से बहुत किसानों को उनका मुआवजा भी दे दिया गया। लेकिन कुछ किसानों ने मुआवजे में असमानता को लेकर भूमि के कागजात देने से इनंकार कर दिया था। जिसको लेकर किसानों, काश्तकारों ने आन्दोलन भी किया था लेकिन कोई खास निबटारा नहीं हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें