गाजीपुर। लोकसभा चुनाव की डुगडु्गी बजने के साथ ही अब चाय-पान की दुकानें राजनीतिक बहस का अखाड़ा बन गई हैं। चाय की चुस्कियों के साथ, जो चुनावी बहस शुरू हो रही है, वह काफी देर तक चल रही है। कभी धीमी, तो कभी जोश में आकर कार्यकर्ता भिड़ जा रहे हैं। आलम यह है चुनावी बहस करने वाले वार्ता में इस कदर मशगूल हो जा रहे हैं कि घंटों चल रही बाताकही और राजनीतिक माथा-पच्ची में उनका ब्लड प्रेशर हाई और लो होने लग रहा है। जमानिया तहसील मुख्यालय पर स्थित बंगाली की चाय की दुकान पर चुनावी बहस कुछ इस तरह शुरू हुई कि शांत होने का नाम ही नहीं ले रही थी। नेता जी राम-राम, नमस्कार गोविंद जी। बंगाली बाबू जरा गोविंद जी को भी चाय पीला देईं। आज का बात ह नेता जी, आप बिल्कुल झकास माड़ीदार कुर्ता-पैजामा पहिन के आइल बानी। गोविंद जी भाई चुनाव कपरे पर बा, अब रोजे एही रूप में हम तोहरा के देखाई देब। सही कहत बानी। इ बताईं कि चुनावी ऊंट कौने करवट बइठत बा। ऐ बेरी मतदान हमारे पार्टी के पाले में होई गोविंद भाई। एहु बारी हमारे पार्टी के झंडा लहराई। हमारे प्रत्याशी के जीत लगभग तय बा, सिर्फ नाम के घोषणा बाकी बा। नाम के घोषणा होते ही हमनी के चुनाव प्रचार में पूरा ताकत झोंक दिहल जाई। भाई हमके लागता कि ऐ बेरी हम लोगों को ज्यादा प्रचार-प्रसार नहीं करना होगा, हमारा प्रत्याशी अपने विकास कार्यों के दम पर चुनाव जीतेंगे। इ कहते तपाक से गोविंद बोल पड़लन अईसन भ्रम मत पाली नेता जी। आप त पुराना राजनीतिज्ञ हई, अऊर अच्छी तरह से जानत हईं कि चुनाव में विकास कार्य क केतना असर पड़ेला। ई समय क चुनाव पूरी तरह से जातिवाद क हो गईल ह। तू त जनते बाड़ा कि जातिवाद क वारयस बहुत खराब होला। सपा-बसपा के गठबंधन के हल्का में मत लेई नेता जी। ई आप लोगन के बहुत परेशान करी। ई गंठजोड़ के बाद भी अगर आपके पार्टी क परचम लहरा जाई त हम मान लेब कि विकास कार्य क आप लोगन के लाभ मिलल बा। आप क पार्टी एहसे टाइट बा कि विपक्ष कमजोर ह। गोविंद जी मैं समझ रहा हूं कि आप यह भाषा कहा से बोल रहे हैं और आप ही नहीं, आपके पार्टी से जुड़े सभी नेता यही भाषा बोल रहे हैं। आप लोगों को यह भ्रम हो गया है कि गठबंधन की वजह से आप लोग जीत का परचम लहरा लेंगे, लेकिन जनता विकास कार्यों का कर्ज चुकाने के लिए आप लोगों का यह भ्रम तोड़ देगी। हमको तो गठबंधन पर इस बात से हंसी आ रही है कि कल तक एक-दूसरे के खिलाफ बोलने वाले नेता आज गले मिल रहे हैं। तनी जबान संभाल के बोली नेता जी। हम अपने नेता लोगन के खिलाफ ना सुन सकिला। अरे भाइय लोगन काहे के राजनीति के पचड़ा में तू लोगन आपन बीपी बढ़ावत बाड़ा। आपो त यही पर बइठल बाड़ा न महेश भइया। नेता जी क भाषा सुनला ह न। छोड़ा बंद करा लोग राजनीतिक बहस। पार्टी के चक्कर में आपन संबंध मत खराब करा लोग।