गाजीपुर। जिले में संचालित राजकीय हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों में शिक्षकों एवं कर्मचारियों की कमी के चलते पठन-पाठन का कार्य प्रभावित हो रहा है। छात्र और शिक्षकों का अनुपात मानक के अनुरूप नहीं है। शिक्षकों के सृजित पद के आधे पदों पर ही शिक्षक तैनात हैं। कर्मचारियों के तो एक तिहाई पद ही भर पाए हैं। ऐसी स्थिति में राजकीय स्कूलों से गुणवत्तापरक शिक्षा दिए जाने की बात सोचना कोरा कागज साबित हो रहा है।
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत जिले में 16 राजकीय हाईस्कूल और 12 राजकीय इंटर कॉलेज संचालित हो रहे हैं। जहां तक राजकीय हाईस्कूलों का सवाल है, इनमें शिक्षकों-कर्मचारियों का काफी अभाव है। हाईस्कूल स्तर के संचालित कुल 16 राजकीय स्कूलों में 16 प्रधानाचार्य के पद सृजित हैं जिसमें 13 स्कूलों में प्रधानाचार्य कार्यरत हैं, जबकि सदरजहांपुर, मधुबन और कनुआन में प्रधानाचार्य का पद रिक्त है। सहायक अध्यापकों के कुल 84 पद सृजित हैं जिसमें 29 पदों पर ही शिक्षक कार्यरत हैं जबकि 55 पद रिक्त हैं। उधर, जिले के राजकीय इंटर कॉलेज की बात करें तो उनकी स्थिति भी सुखद नहीं है। जिले में एक राजकीय बालक और 11 राजकीय बालिका इंटर कॉलेज संचालित हो रहे हैं। इन कॉलेजों में किसी में भी प्रधानाचार्य नहीं हैं। सभी जगह प्रभारी प्रधानाचार्य से काम लिया जा रहा है। प्रवक्ता के कुल 118 पद रिक्त हैं जिसमें 37 पर ही प्रवक्ता कार्यरत हैं। सहायक अध्यापक के कुल 153 पद सृजित हैं, इन पदों में से 65 पदों पर ही सहायक अध्यापक कार्यरत हैं। जहां तक कार्यालय सहायक की बात है कुल 25 ही कार्यरत हैं। जबकि चपरासी में सिर्फ 44 ही तैनात हैं। इन विषम परिस्थितियों में इन कॉलेजों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करना कितना संभव होगा।