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लाखों लोगों को प्रेरणा और मार्गदर्शन दे रहा है राम का पावन चरित्र

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सुहवल। क्षेत्र के बवाड़ा गांव स्थित गंगा तट पर एक कुंडीय श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ एवं रामचरितमानस कथा प्रवचन आयोजित है। कथा के दूसरे दिन शनिवार को अयोध्या से आए 1008 श्रीश्री शिवराम दास फलहारी बाबा ने कहा कि श्रीराम वैदिक संस्कृति और सभ्यता के आदर्श प्रतीक हैं। राम के जीवन में वैदिक संस्कृति का साकार रूप देखने को मिलता है। आज हजारों वर्षों से राम का पावन चरित्र लाखों लोगों को प्रेरणा और मार्गदर्शन दे रहा है।
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उन्होंने कहा कि धर्मप्राण भारतीय जीवन दृष्टि, महान चरित्र और मानवीय आदर्श सबसे अधिक राम के जीवन में प्रत्यक्ष देखने को मिलता है। वाल्मीकि ने विभिन्न स्थलों पर राम को धर्मज्ञ, धर्मस्य, परिरक्षक, धर्मनित्य, धर्मात्मा आदि शब्दों से संबोधित किया है। श्रीराम को मर्यादा पुरूषोत्तम कहा जाता है। बचपन से जीवन पर्यंत राम के जीवन का कोई भी भाग देखें तो उनके जीवन में कहीं भी मर्यादा का उल्लंघन हुआ हो, ऐसा देखने को नहीं मिलता। कहा कि विद्यार्थी जीवन, गृहस्थ राजा, पिता-पुत्र, पति-पत्नी, स्वामी-सेवक, गुरू-शिष्य अथवा भाई के रूप में सर्वत्र एक नियमित जीवन दिखाई देता है। विकारों, विचारों अथवा व्यवहार में उन्होंने कहीं भी मर्यादा नहीं छोड़ी।
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