गाजीपुर। लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। चाय-पान की दुकानों पर भीड़ बढ़ने लगी है। राजनीतिक बहस जगह-जगह चल रही है। चाय की चुस्कियों के साथ हर रोज सुबह और शाम चुनावी चर्चा पर लोग चुटकी लेते देखे जा रहे हैं। ऐसे में लोगों की गरमा-गरम बहस सुन वहां खड़े लोगों से भी बिना बोले नहीं रह जा रहा है। जिससे बहस खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। आलम यह है कि सियासी सरगर्मी हर रोज बढ़- घट रही है। इस बहस में अलग-अलग दलों के कार्यकर्ता आपस में भिड़ जा रहे हैं। यह चुनावी बहस का कोई अंत नहीं दिखाई दे रहा है। घंटों राजनीतिक माथा-पच्ची के बाद लोग एक-दूसरे से खुश और नाराज हो जा रहे हैं। सोमवार को नंदगंज के शहीद स्मारक इंटर कॉलेज के पास स्थित मटरू मद्धेशिया की चाय की दुकान पर कुछ इस तरह से शुरू हुई चुनावी चर्चा। माखन भइया नमस्कार। राम-राम नेता जी। आज-कल कहां रहत हई नेता जी, दिखाई ना देत बाड़ी। आप तो जान ही रहे हैं न माखन जी की चुनाव का समय चल रहा है। हमारा ज्यादा समय नेता जी के साथ ही बीत रहा है। लगता है कि गठबंधन की वजह से इस बार हम लोगों को ज्यादा कसरत करना पड़ेगा। लोगों से संपर्क करने पर अभी तक यही बात सामने आ रही है कि हमारी पार्टी प्लस में है। यही बात त नेता जी सबही पार्टी क लोगन कहत बाड़ा। केहू चुनाव हारे के तइयार ना दिखाई देत बा। हमार बिरादरी भी गठबंधन के बाद ई आस से टाइट दिखाई देत बा कि ई बार हमनी क सरकार बनी। खास बात ई ह कि हमरे पार्टी के हमरे बिरादरी क त वोट मिलबे करी, अऊर बिरादरी के लोग भी वोट करिहन। आप जातिवाद की बात कर रहे हैं माखन जी। विकास की बात करिए। हमारी सरकार की योजनाओं का लाभ हर जाति-धर्म के लोगों को मिल रहा है। सरकार ने योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचाने में कोई भेदभाव नहीं किया है। आप के मुंह से ई बात अच्छा ना गलत ह कि नेता जी कि हम जातिवाद क बात करत हई। आपो ई बात अच्छी तरह से जानत हई कि चुनाव में जमके जातिवाद चलेला। अऊर योजना क बात रहल त जऊने पार्टी क सरकार होला, ओकरे योजना का लाभ कुल जाति के लोगन के मिलेला। आपके सरकार के गलत नीति के वजह से हमरे मुखियां के गठबंधन करे के खातिर मजबूर होखे के पड़ल बा। गठबंधन की वजह से अबकी बार हमार पार्टी आपके पार्टी पर भारी पड़ी। सबही भाइया लोगन के नमस्ते। आवा दामोदर भइया बइठा। नेता से जी का चुनावी बहस करत बाड़ा जोखन भइया। तोहके ई बात क चिंता ना ह कि फीस जमा ना होखे से तोहार लइका स्कूल ना जात बा। पहले लइका क फीस जमा करेके सोच। ई राजनीति खाए के ना देई भइया। तू त ई बात कहके हमार मूडे खराब कई देहल दामोदर भइया।