गाजीपर। जनपद में बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने की कवायद जारी है। लेकिन तमाम जतन करने के बाद भी विभिन्न विकास खंडों को चिह्नित कर गांवों को कुपोषण मुक्त नहीं किया जा सका है। इन गांवों में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या अभी भी 122 है। ऐसे में शासन की ओर से निर्धारित अवधि 31 अगस्त तक इन गांवों को कुपोषण मुक्त करना संभव नहीं लग रहा है।
गांव को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार की ओर से योजना कई योजना चलाई जा रही है। इसके तहत जिले के 16 विकास खंडों में कुल 80 गांवों को 40 जिलास्तरीय अधिकारियों ने गोद लिया था। इनको कुपोषण मुक्त कराए जाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया था। संबंधित अधिकारियों की ओर से गोद लिए गए अपने-अपने गांव के निरीक्षण से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर कुल 315 बच्चे नवंबर माह में अति कुपोषित चिह्नित हुए थे। पिछले छह माह में विभागीय और अन्य विभागों के अथक प्रयास के बाद भी जुलाई माह तक अति कुपोषित बच्चों की संख्या 122 रह गई है। यह संख्या जिले के 16 विकास खंडों के 50 गांव में बनी है। सबसे ज्यादा बच्चे जमानिया और रेवतीपुर विकासखंड में हैं, जबकि तीन विकास खंडों में इनकी संख्या शून्य है। शासन की ओर से निर्धारित अवधि 31 अगस्त तक सभी गोद लिए गांव को कुपोषण मुक्त घोषित करने का फरमान जारी किया है। ऐसे में शेष समय में गांव को कुपोषण मुक्त कर पाना आसान नहीं दिखाई दे रहा है। इस संबंध में जिला कार्यक्रम अधिकारी अमरनाथ मौर्य ने बताया कि विभाग की ओर से अन्य पांच विभागों (स्वास्थ्य, पंचायती राज, शिक्षा, खाद्य एवं आपूर्ति एवं ग्राम्य विकास) से समन्वय स्थापित कर गांवों को कुपोषण मुक्त किए जाने का प्रयास किया जा रहा है।
जमानिया में सबसे ज्यादा अति कुपोषित बच्चे
गाजीपुर। अधिकारियों की ओर से गोद लिए गए 80 गांव में अति कुपोषित बच्चों की संख्या 122 है। इसमें ऐसे सबसे अधिक बच्चे जमानिया ब्लाक में 29 एवं रेवतीपुर में 23 हैं। इसके अलावा करंडा में 4, मरदह 7, मुहम्मदाबाद 16, बिरनो, सदर एवं भदौरा 3-3, भांवरकोल, सादात में 5-5, सैदपुर 1, देवकली 16 तथा जखनिया विकासखंड में 7 अति कुपोषित बच्चे हैं। बाराचवर, कासिमाबाद एवं मनिहारी ब्लाक के चिन्हित गांव में एक भी अति कुपोषित बच्चा नहीं है।
कुपोषण मुक्त होने पर होंगे सम्मानित
गाजीपुर। गांव को कुपोषण मुक्त करने को लेकर मुख्य विकास अधिकारी गंभीर हैं। शुक्रवार को आयोजित कार्यशाला में उन्होंने सुपरवाइजर, आंगनबाड़ी को गांव को शत-प्रतिशत कुपोषणमुक्त करने का निर्देश दिया था। कहा था कि सभी केंद्रों पर कुपोषण पंजिका जरूर रखी जाए और उसे समय-समय पर चेक भी किया जाए। जिसके गांव कुपोषण मुक्त पाए जाते हैं तो उन्हें सम्मानित किया जाएगा और जिस गांव में कुपोषित बच्चे रह जाते हैं उनकी खैर नहीं है।