जिला विद्यालय निरीक्षक नरेंद्रदेव पांडेय अपने कड़क तेवर को लेकर हमेशा चर्चा में रहे। आरंभ से लेकर अब तक गलत लोगों की दाल न गलने देने की वजह से उनके विरोधी बढ़ते गए। यूपी बोर्ड परीक्षा में भी नकल माफियाओं और नेताओं के दबाव में आने की वजह से सफेदपोश भी उनके दुश्मन बन गए। पिछले एक साल तक लगातार डीआईओएस के खिलाफ आंदोलन चलता रहा। बीते गुरुवार को डीआईओएस को इलाहाबाद शिक्षा निदेशालय से संबद्ध कर दिया गया लेकिन अभी तक डीआईओएस को कार्यमुक्त नहीं किया गया है।
जिला विद्यालय निरीक्षक नरेंद्रदेव पांडेय के कार्यों से सत्ता दल के नेता और शिक्षक संघ काफी नाराज थे। शिक्षक संघ द्वारा डीआईओएस पर भ्रष्टाचार, शिक्षक उत्पीड़न, गालीगलौज करने समेत अन्य आरोप लगते रहे। इसे लेकर समय-समय पर आंदोलन भी जारी रहा। लंबे आंदोलन बाद भी जब शासन ने डीआईओएस को नहीं हटाया तो जिले के जनप्रतिनिधियों की मदद ली गई। आंदोलन में अन्य संगठनों को शामिल किया गया। धरना-प्रदर्शन, कार्य बहिष्कार होते रहे। शिक्षक संघ और डीआईओएस के बीच बढ़ती जा रही खाई को पाटने के उद्देश्य से शासन ने बीते गुुरुवार को जिला विद्यालय निरीक्षक को कुर्सी से हटाने का फरमान जारी करते हुए शिक्षा निदेशालय इलाहाबाद से संबद्ध कर दिया है। अब शिक्षक संघ तथा जिले के जनप्रतिनिधि डीआईओएस को जल्द से जल्द कार्यमुक्त कराने में जुटे हुए हैं। हालांकि अब भी बहुत सारे लोग डीआईओएस के पक्ष में हैं।