दिलदारनगर/बारा(गाजीपुर)। दिलदारनगर के मिर्चा गांव स्थित मदरसा ख्वाजा गरीब नवाज के परिसर में रविवार की रात 33वां ख्वाजा गरीब नवाज कांफ्रेंस एवं जश्ने दस्तार बंदी हिफ्ज का आयोजन हुआ। इसमें दूरदराज से आए नामचीन इस्लामी शायरों ने एक से बढ़कर एक नात-ए-पाक एवं मकबत पेश किया। मुख्य वक्ता बिहार से आए मौलाना नुमान अख्तर फाएक अल जमाली ने कहा कि दोनों जहान की कामयाबी सुन्नते रसूल की पैरवी में है। इसने रसूल की पैरवी नहीं की वह न तो दुनिया में कामयाबी हासिल कर सकता है और न ही उसकी आखिरत की जिंदगी रोशन और ताबनाक हो सकती है।
उन्होंने कहा कि अल्लाह पाक ने अपने प्यारे हबीब को सारे आलम का मोहसिन बनाकर दुनिया में भेजा। मोहसिने इंसानियत ने अपने हर अमल के जरिए भाईचारा और मोहब्बत का पैगाम दिया है, जो दीन-ए-इस्लाम का असल मकसद है। इस्लाम में हर इंसान का हुकूक मुकर्रर है। गरीब का अमीर पर और कमजोर का बलशाली, औरत का मर्द पर हक कायम है, जिसे इस्लाम ने पूरा करने की हिदायत दी है। कहा कि इस्लाम ने जो बराबरी का दर्जा दिया है उस पर इस्लाम के मानने वाले अगर सही मायने में अमल करना शुरू कर दें तो दुनिया की सारी खराबियां मिट जाएंगी और अमन कायम हो जाएगा। कारी जिकरुल्लाह साहब ने कहा कि दुनिया की रहनुमाई और हिदायत के लिए अल्लाह पाक ने हमें एक अजीम तोहफा कलाम-ए-पाक की शक्ल में दिया है। इस मौके पर हाजी शौकत खां, खालिक खां, आफताब खां, शुएब खां, तौहीद खां, शमीम खां, आसिफ खां, इबरार ख़ां, ग्यासुद्दीन खां आदि मौजूद रहे। मुफ्ती नौशाद खां की कयादत एवं कारी नदीम रजा की हिमायत में आयोजित इस कांफ्रेंस की सदारत मौलान रियाज हुसैन शम्शी ने और संचालन मौलाना आसिफ रजा सैफी ने किया।