मुहम्मदाबाद (गाजीपुर)। खरीफ के सीजन में स्थानीय विकासखंड के चार गांव के किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ पाने से वंचित रह गए। कृषि विभाग द्वारा फसल बीमा के तहत इन गांवों में पैदा होने वाली फसल अधिसूचित नहीं की गई है। इससे इन गांवों के किसानों को फसली ऋण और बीमा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
खरीफ के सीजन में एक अप्रैल से 31 जुलाई के बीच बैंकों से फसली ऋण लेने वाले किसानों का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसल बीमा हुआ है। जनपद के किसानों का बीमा करने के लिए टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा करने के लिए अधिकृत किया गया है। जनपद में खरीफ के लिए धान, मक्का बाजरा और ज्वार की चार फसलें अधिसूचित हैं, जिनका बीमा किया जाएगा। पूरे प्रदेश में सोनभद्र को छोड़कर जहां की प्रीमियम की धनराशि 15 प्रतिशत है। जनपद में धान की फसल के बीमा का प्रीमियम 12 प्रतिशत निर्धारित है जिसमें किसान को दो प्रतिशत प्रीमियम राशि देनी है। शेष पांच प्रतिशत राज्य सरकार और पांच प्रतिशत केंद्र सरकार प्रीमियम की धनराशि देगी। धान की प्रति हेक्टेयर 48598 रुपये, मक्का की 17973, बाजरा 17328 और ज्वार 21025 रुपये प्रति हेक्टेयर मूल्य निर्धारित है। मक्का की प्रीमियम धनराशि पांच प्रतिशत, बाजरा का सात, ज्वार का दो प्रतिशत प्रीमियम धनराशि रखी गई है। स्थानीय विकासखंड में ब्लाक प्रमुख रामकृत सिंह यादव के गांव सलेमपुर सहित चार गांवों मलिकपुरा, बखारीपुर, करनपुरा, बढ़ईपुर में कोई भी फसल अधिसूचित न होने से इन गांवों के किसानों का फसल बीमा नहीं हो सका है। केंद्र सरकार की किसानों के लिए लाभकारी इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ नहीं मिल पाने से इन गांवों के किसानों में काफी मायूसी है। इसी तरह जनपद में कुल 47 गांवों में कोई भी फसल अधिसूचित न होने से इन गांव के किसानों को फसल बीमा का लाभ नहीं मिल पाया है। राष्ट्रीयकृत बैंकों के साथ-साथ साधन सहकारी समितियों द्वारा किसानों को फसली ऋण दिया जाता है। जनपद में सहकारी समितियों द्वारा 2242 किसानों को दो करोड़ 41 लाख रुपये का फसली ऋण दिया गया है। वहीं विकासखंड में सहकारी समितियों द्वारा 320 किसानों को 22 लाख 44 हजार ऋण दिया गया है। इन किसानों का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराया गया है। बैंकों से ऋण न लेने वाले किसान इस योजना से वंचित रह जा रहे हैं।
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जनपद में किसी भी गांव में अधिसूचित फसल न होने की जानकारी मिलने पर उन गांवों के किसानों का बीमा कराया जाएगा। अधिसूचित गांवों की सूची में नाम न होने के बावजूद बीमा कंपनी के पोर्टल पर इन गांवों की भी डाटा फीडिंग हो सकती है। - यूपी सिंह, उपनिदेशक, कृषि विभाग