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मेजर विकास सिंह का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन

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सुहवल(गाजीपुर)। शहीद मेजर विकास सिंह का पार्थिव शरीर सोमवार को देर रात पंचतत्व में विलीन हो गया। नम आंखों से जनपदवासियों ने मिट्टी के लाल को अंतिम विदाई दी। शहीद के अंतिम दर्शन के लिए रात में भी लोग डटे रहे। इस मौके पर सांसद तथा रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा, पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सिंह, सदर एवं जमानिया की विधायक समेत जनपद के आलाधिकारी भी मौजूद रहे। शहीद को हजारों हाथों ने एक साथ श्रद्धांजलि दी तथा गंगा घाट पर मुखाग्नि उनके चाचा देवेंद्र सिंह ने दी। जिला एवं पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में सेना के जवानों ने गार्ड आफ आनर दिया।
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सोमवार को देर रात करीब साढ़े दस बजे फूलों से सजे सेना के वाहन से दर्जनों सैनिक तिंरगे लिपटे शहीद मेजर विकास सिंह का पार्थिव शरीर लेकर उनके पैतृक गांव पहुंचे। इसके बाद वहां का पूरा माहौल गमगीन हो गया। पार्थिव शरीर को सबसे पहले उनके घर ले जाया गया, जहाँ पत्नी आंचल सिंह ने दुधमुंही बच्ची संग पति के शव से लिपट कर रोने लगीं। इस दौरान सबकी आंखें नम हो गईं। इसके बाद पार्थिव शरीर को घर के बाहर सड़क किनारे लगे टेंट में रखा गया, जहां क्षेत्रीय लोगों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस बीच सबसे पहले सैन्य कर्मियों ने मातमी धुन के बीच शस्त्र उल्टा कर तथा हवा में कई राउंड फायर कर जवान को अंतिम विदाई दी। इसके बाद एक- एक कर लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित किया। इसके बाद फूलों से सजे पिकअप पर उनके पार्थिव शरीर को रख हजारों लोगों ने ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, मेजर विकास तेरा नाम रहेगा’ गगभेदी नारे लगाते हुए पैदल ही सैकड़ों दो पहिया, चार पहिया वाहनों के लंबे काफिले से होते हुए गाजीपुर श्मशान घाट पहुंचे, जहाँ उन्हें मुखाग्नि दी गई।
दो दिन पूर्व ताड़ीघाट निवासी मेजर विकास सिंह, जो कश्मीर के कुपवाड़ा में 57 आरआर बटालियन में तैनात थे। रात्रि को सर्वेक्षण के दौरान एंम्बुश लगाते समय पैर फिसलने के चलते वह गहरे खाई चले गए। जिसके कारण गंभीर रूप से वह जख्मी हो गए। सेना के कमांड अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी।
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