गाजीपुर। लगातार दूसरे दिन भी नदियों का पानी घटाव पर रहा। तटवर्ती गांवों में जहां पानी घुस, गया था, वह धीरे-धीरे निकल रहा है। पानी से घिरे गांवों की हालात भी थोड़ी सुधरने लगी है। हालांकि कभी कभी हो रही तेज धूप से जमा पानी सड़ने लगा है और संक्रामक रोगों का खतरा बना हुआ है। सैदपुर क्षेत्र में भी कहर बरपा रही गोमती के घटने से गांवों में लोग चैन की सांस ले रहे है। गांवों के पास से पानी वापस होने लगा है। पानी घुसे गांवों में कीचड़ और गंदगी का साम्राज्य फैल गया है। जमानियां क्षेत्र में कर्मनाशा का पानी भी गांवों से निकल रहा है। जिला प्रशासन ने भी जायजा लेने के बाद राहत के आवश्यक निर्देश दिए हैं।
गंगा में घटाव का क्रम धीमी गति से बना रहा। शुक्रवार को भी एक सेमी प्रति दो घंटा की रफ्तार से जलस्तर में कमी देखी गई। तीन बजे तक नदी का जलस्तर 62.310 मीटर था। उधर उत्तराखंड तथा नरौरा बांध से गंगा में लगातार पानी छोड़े जाने से जलस्तर तेज बढ़ रहा था। करीब तीन दिन तक पानी बढ़ने से जिले के कई तटवर्ती इलाकों में हालात खराब होने लगे। बाढ़ के दिनों में गंगा की वजह से जिले के पांच तहसीलों के सैकड़ों गांव प्रभावित होते हैं। कंरडा के बड़हरिया और रफीपुर में कटान के चलते तबाह होने के कगार पर पहुंच गए हैं। अब घटाव होने के बाद मुहम्मदाबाद, सैदपुर, जमानियां आदि क्षेत्रों के दर्जनों गांवों के समीप पहुंचा पानी धीरे निकल रहा है। लोगों में राहत दिख रही है। इधर केंद्रीय जल आयोग के हसनैन ने बताया कि अब गंगा में घटाव का रुख दिखाई दे रहा है।
जमानिया संवाददाता के अनुसार इस क्षेत्र में तबाही मचाने गांवों की ओर बढ़ रही गंगा और कर्मनाशा नदियों के जल स्तर में उतार का क्रम दूसरे दिन भी जारी रहा। पानी निकलने से बाढ़ प्रभावित गांवों की हालत में थोड़ी सी सुधार दिख रही है। पानी तो निकलने लगा है लेकिन अब कीचड़ और गंदगी का साम्राज्य फैल गया है। गांव में बदबू होती जा रही है। इससे संक्रामक रोगों के प्रसार का खतरा बढ़ता जा रहा है। प्राथमिक स्कूल धुस्का के बाढ़ शरणालय में रह रहे कुछ लोग अब अपने सामानों को घर ले जाने लगे हैं। गायघाट गांव की भी लगभग यही हालत बनी हुई है। किसानों की पचासों एकड़ धान, चरी, अरहर समेत आदि फसलें जलमग्न हैं। निपरान और गढ़वा गांवों की और जा रहा पानी अब ठहर गया है जिससे लोगों में राहत है। उपजिलाधिकारी विनय कुमार गुप्ता ने बताया कि अब गांवों की हालत सुधर रही है। स्वास्थ्य विभाग को सतर्क कर दिया गया है। सभी गांवों में राहत टीम काम करेगी।
औड़िहार संवाददाता के मुताबिक गोमती के नरम रुख के चलते गौरी , गोरखा , गौरहट, तेतारपुर आदि गांवों का पानी निकलने लगा है। प्रभावित ग्रामीण थोड़ी राहत महसूस कर रहे हैं। किसानों की सैकड़ों एकड़ जमीन जलमग्न है । खेतों में लगा पानी निकलने में काफी समय लगता है। जलमग्न होने के कारण फसलें अब सड़ने लगी हैं। इसी प्रकार सूर्यभान चक, खरौना, सिधौना, कुशई , खरौना, अमेहता, नूरुद्दीनपुर, नेवादा , गदनपुर, वहदिया, नगरिया नाला, तेलियानी, बहुर ा, भुजाड़ी आदि गांवों के लोग भी अब थोड़ी राहत महसूस कर रहे हैं।