भांवरकोल। थाना क्षेत्र के शेरपुर के मुबारकपुर पुरवा (निषाद बस्ती) में शनिवार की शाम अज्ञात कारणों से लगी आग में 53 झोपड़ियां जलकर राख हो गई। घटना में एक मासूम बच्ची भी जिंदा जलकर मर गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
शेरपुर के मुबारकपुर पुरवा (निषाद बस्ती) के अधिकांश लोग मेहनत-मजदूरी करते हैं। रोज की तरह आज भी अदिकांश लोग मिर्चा और टमाटर की तोड़ाई करने के लिए गए थे। इसी बीच शाम को करीब चार बजे अज्ञात कारणों से साहब चौधरी की झोपड़ी में आग लग गई। देखते ही देखते ही इस आग ने अन्य 52 झोपड़ियों को भी अपनी जद में ले लिया। जैसे ही आग भोला चौधरी की झोपड़ी में पहुंची, अंदर मौजूद उसकी बेटी पूजा (3) और उसकी बड़ी बहन आंचल (8) घबरा गए। आंचल तो किसी तरह से झोपड़ी से भागकर बाहर निकल गई, लेकिन छोटी बहन पूजा झोपड़ी के अंदर ही फंस गई। भागकर बाहर आई आंचल इस बात का शोर मचाने लगी कि उसकी छोटी बहन झोपड़ी के अंदर मौजूद है। आनन-फानन में जब तक लोगों ने पानी डालकर आग की लपटों को शांत किया, तब तक झुलसने से मासून पूजा की दर्दनाक मौत हो गई। इससे परिवार में कोहराम मच गया। सूचना मिलने ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। परिजनों से घटना के संबंध में जानकारी लेने के बाद शव को कब्जे में ले लिया। इस संबंध में पुलिस ने बताया कि शव को कब्जे में ले लिया गया है। लिखा-पढ़ी के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाएगा।
इनसेट
आग से 53 झोपड़ियां जलकर हुई राख
भांवरकोल। थाना क्षेत्र के शेरपुर के मुबारकपुर पुरवा (निषाद बस्ती) में शनिवार की शाम अज्ञात कारणों से एक झोपड़ी में आग लग गई। कुछ ही देर में इस झोपड़ी की आग ने 52 अन्य झोपड़ियों को भी अपनी जद में लिया और 53 झोपड़ियों से आग की लपटें उठने लगी। ग्रामीणों ने काफी प्रयास के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तबतक झोप ड़ियों के साथ ही उसमें रखा हजारों का सामान जलकर राख हो गया।
शेरपुर के मुबारकपुर पुरवा (निषाद बस्ती) के लोग मेहनत-मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करते थे। शनिवार को बस्ती की अधिकांश महिला-पुरुष मजदूरी के क्रम में मिर्चा और टमाटर की तुड़ाई करने के लिए गए थे। शाम को करीब चार बजे अज्ञात कारणों से साहब चौधरी के झोपड़ी में आग लग गई। जब तक लोग आगे को बुझाने की कोशिश करते है, तब तक तेज वहा की वजह आग फैलती गई। कुछ ही मिनट ने आसपास की अन्य 52 झोप ड़ियां धू-धूककर जलने लगे। जानकारी ग्रामीण हो-हल्ला के बीच आग बुझाने में जुट गए। सूचना मिलते ही मजदूरी करने के लिए गए लोग भी वहां पहुंच गए। काफी प्रयास के बाद लोगों ने आग पर काबू पाया। आग की इस घटना में झोपड़ियों के साथ ही उसने रखा बिस्तर, पहनने के लिए कपड़ा, अनाज, चारपाई सहित गृहस्थी का हजारों का सामान जलकर राख हो गया। पीड़ित साहब गौतम, सुरेश, रामनिवास, श्रीगरचंद, श्यामलाल, भोला, रामचीज, बाबूलाल, गंगासागर, विरेंद्र, रविंदर, ओमप्रकाश, प्रेमप्रकाश, शिववचन, जगदीश, गुलाब आदि ने बताया कि आग में सबकुछ जल जाने के बाद परिवार खुले आसमान के नीचे आ गया है। परिवार के सामने रहने और पेट भरने का संकट खड़ा हो गया है।