गाजीपुर। जिले में पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार करना अब काफी सुविधाजनक होगा। श्मशान घाट की सूरत कुछ ऐसी ही बदलने वाली है कि वहां अब कई सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसमें शवों को स्नान कराने से लेकर एक कम लकड़ी में जलाने की व्यवस्था होगी। शहर के गंगा तट पर दो श्मशान घाट तैयार किए जाएंगे। इसमें तीन करोड़ से अधिक लागत लगेगी। एक श्मशान घाट पर एक साथ 10 शवों को जलाने की व्यवस्था होगी। जिसमें दो इट्रोवाइज उडेन क्रीमोटोरियल शवदाह गृह बनाए जाएंगे। रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा के प्रयास से सुविधाजनक श्मशान घाट बनाने का जिम्मा एचएफसीएल कंपनी को दिया गया है।
नगर के मुख्य मार्ग से जुड़े श्मशान घाट के कायाकल्प की कवायद शुरू हो गई है। रेल राज्यमंत्री की पहल पर एचएफसीएल कंपनी ने श्मशान घाट का बेहतर डिजाइन तैयार कर इसे सुविधाजनक बनाने की पूरी तैयारी कर ली है। बहुत जल्द इसे अमलीजामा पहनाया जाएगा। अब श्मशान घाट पर शवों को स्नान कराने के साथ उनको कम लकड़ी में जलाने तक की व्यवस्था की जाएगी। दोनों श्मशान घाटों पर जाने से पहले मुख्य रास्ते पर शांति द्वारा बनेगा। पास स्थित शौचालय और मंदिर का भी सुंदरीकरण किया जाएगा। गंगा नदी के तट तक मार्ग बनाया जाएगा। घाट पर कूड़ा-कचरे के निस्तारण की भी व्यवस्था होगी। एक श्मशान घाट पर एक साथ दस पार्थिव शरीर के अंतिम संस्कार की व्यवस्था रहेगी। इसमें दो इट्रोवाइज उडेन क्रीमोटोरियल शवदाहगृह भी बनेंगे। जिसमें कम लकड़ी में शवों को जलाने की अच्छी व्यवस्था रहेगी।
इस संबंध में रेल राज्यमंत्री के प्रथम निजी सहायक सिद्धार्थ राय ने बताया कि अंतिम संस्कार में आए लोगों को ठहरने के लिए दो अलग-अलग शेड बनवाए जाएंगे। जिससे शवदाह के दौरान अंतिम क्रिया में मौसम की मार से व्यवधान न पडे़। अभी तक शवों का अंतिम संस्कार जैसे-तैसे किया जाता था। अब एक-एक घाट पर दस-दस नए शवदाह स्थल बनाए जाएंगे। इसे बहुत जल्द रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा हरी झंडी देने वाले हैं। शवों के साथ आने वाले लोगों के बैठने के लिए सीमेंट के कई स्लैब भी बनवाए जाएंगे। लगभग 30 करोड़ की लागत से अन्य सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। दोनों श्मशान घाटों पर एक समान व्यवस्था होगी। अंतिम संस्कार के बाद स्नान आदि करने में दिक्कत न हो इसके लिए नदी तट तक रास्ता बनाया जाएगा। पार्थिव शरीरों को स्नान कराने की व्यवस्था होगी, जिससे अंतिम संस्कार के पूर्व शवों के शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी कराई जा सके।