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हृदय के भीतर होता है तारक बह्म का दर्शन

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गाजीपुर। शहर के लाल दरवाजा स्थित आनंद मार्ग विद्यालय में दो दिवसीय जिला स्तरीय सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के प्रथम चरण के तहत स्कूल के छात्रों ने प्रभात फेरी निकाली तथा योगाभ्यास किया। करीब तीन घंटे तक सिद्ध अष्टाक्षरी मंत्र बाबा नाम केवलम का जाप किया गया।
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सेमिनार में केंद्रीय प्रशिक्षक आचार्य गुणींद्रानंद अवधूत ने कहा कि मानव जीवन में आदर्श का होना अति आवश्यक है। इसके बिना जीवन पशुवत हो जाता है। मनुष्य अपने इष्ट से आत्मीयता रखता है और उससे अधिक प्रेम करता है। तारक ब्रह्म ही मानव का इष्ट है जिससे वह अपना दुख-सुख कहता है। उसका दर्शन वाह्य रूप में नहीं बल्कि हृदय के भीतर ही होता है। कहा कि मानवीय मूल्य सर्वोपरि है। इसे हमेशा महत्व देना चाहिए। स्वयं में सुधार लाने का अवसर मिलता है। तारक ब्रह्म विषय को रेखांकित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि मानव सभ्यता की अग्रगति जब रुक जाती है तो तारक ब्रह्म जीवों को आदर्श का मार्ग प्रवर्तक कर मुक्ति मोक्ष का दिग्दर्शन करने के लिए मानव देह लेकर धरती पर आते हैं। अन्याय, अत्याचार के विरुद्ध लोगों को तैयार करते हैं। इसमें शुभ शक्ति की जीत होती है। कहा कि आनंदमूर्ति जी तारक बह्म के रूप में आए और लोगों को आनंद मार्ग दिया। इस कार्यक्रम में आचार्य विष्णु मित्रानंद, अशोक आदि ने सराहनीय भूमिका निभाई।
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