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लाल जहर पीने को मजबूर हैं जनपदवासी

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गाजीपुर। गंगा किनारे पांच किमी की परिधि में बसे 24 बस्तियों की एक लाख से अधिक की आबादी आर्सेनिक और फ्लोराइड से प्रभावित है। आर्सेनिकयुक्त पानी (लाल जहर) पीने से लोग विभिन्न रोगों की चपेट में आ रहे हैं। साथ ही फ्लोराइड युक्त पानी दांतों को प्रभावित कर रहा है। जल निगम की ताजा रिपोर्ट में गंगा के तटीय इलाकों की बस्तियों में आर्सेनिक और फ्लोराइड पाए जाने की पुष्टि हुई है। इसे दूर करने के लिए पिछले डेढ़ दशक से प्रदेश सरकार तथा वर्ल्ड बैंक की कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं।
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अध्ययनकर्ताओं की माने तो पानी में इन हानिकारक तत्व लोगों के स्वास्थ्य पर सीधे असर करते हैं। जांच में यह बात भी सामने आई है कि आर्सेनिक और फ्लोराइड युक्त जल नदी किनारे बसे गांवों के लोग पीने को मजबूर हैं। इसमें ज्यादातर बाढ़ प्रभावित क्षेत्र भी शामिल हैं। लाल जहर लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल रहा है। भू वैज्ञानिकों की माने तो वयस्कों की तुलना में तीन से आठ साल के बच्चों के स्वास्थ्य पर आर्सेनिक और फ्लोराइड का प्रभाव ज्यादा देखने को मिल रहा है।
देखा जाए तो गंगा नदी के बाढ़ग्रस्त इलाकों में प्रति लीटर भूजल में आर्सेनिक की मात्रा 10.01 माइक्रोग्राम तथा फ्लोराइड का स्तर 1.70 मिलीग्राम दर्ज किया गया है। इनके अलावा नाइट्रेट, आयरन तथा टीडीएस की मात्रा कहीं अधिक, तो कहीं कम है। ग्रामीण इलाकों में लोग भूमिगत जल स्त्रोत पर निर्भर हैं। जिसमें आर्सेनिक की अधिकता होने के चलते लोग विभिन्न रोगों से पीड़ित हैं। आर्सेनिक प्रभावित बस्तियों पर नजर डालें तो सुखडेहरा, गुरनाम, सदकलपुर, धरम्मपुर उपरवार, धरम्मपुर करंडा, दीनापुर, हरदिया, तमलपुरा, गौरा, कालूपुर, मस्तखान, मेदनीपुर, पटकनिया, रेवतीपुर, सुहवल, सुजानपुर, डांही, करौना, तेतारपुर, भागीरथपुर सहित कुल 24 बस्तियां शामिल हैं। इसके अलावा जैतपुरा, चोचकपुर, कानाडीह, बहादुरगंज और पारा गांव में पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक पाई गई है। इसी माह सैदपुर तहसील के तेतारपुर तथा जखनियां तहसील के गौरानामजद तदकलपुर लालापुर को भी आर्सेनिक प्रभावित गांवों की सूची में शामिल किया गया है।
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भू जल में आर्सेनिक के स्रोत
जल निगम के सहायक अभियंता आशीष कुमार ने बताया कि भूजल में आर्सेनिक के मूल स्रोत फेरीहाइड्राइट, गोइथाइट और साइडेराइट और फ्लोराइड का मूल स्रोत एपेटाइट पाया गया है। जल निगम द्वारा जगह-जगह से एकत्र किए गए नमूने दो साल तक किए गए अध्ययन के दौरान गंगा नदी के किनारे तथा कछार के ऊपरी, मध्यम और निचले क्षेत्रों में भूजल के नमूने एकत्रित किए गए। इन नमूनों में मिट्टी के पीएच मान, सोडियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम, आयरन, बाइकार्बोनेट, सल्फेट एवं फॉस्फेट जैसे तत्वों की सांद्रता का आकलन किया गया है।
आर्सेनिक से सभी अंग पर पड़ता है प्रभाव : डॉ. आरके सिन्हा
गाजीपुर। डिप्टी सीएमओ डॉ. आरके सिन्हा ने बताया कि पानी में आर्सेनिक की अधिकता जहां पूरे शरीर को प्रभावित करती है, वहीं फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने पर दांतों को सबसे अधिक हानि पहुंचता है। कहा कि आर्सेनिकयुक्त पानी के निरंतर सेवन से पहले बीमारी और बाद में व्यक्ति की असमय मृत्यु तक हो सकती है। आर्सेनिक व्यक्ति के आंत, आंख, फेफड़ा सहित अन्य अंगों को धीरे-धीरे प्रभावित करने लगता है।
लाखों खर्च के बाद भी नहीं बदली तस्वीर
गाजीपुर। जनपद के गौरा नामजद लालापुर, धर्मारपुर, दीनापुर, हर्दिया, तमलपुरा, कालूपुर, रेवतीपुर, सुहवल आदि दर्जनभर से अधिक गांवों को आर्सेनिक मुक्त करने के लिए पिछले डेढ़ दशक में लाखों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इन गांवों में ट्यूबवेल, इंडिया मार्का हैंडपंप, पानी टंकी की स्थापना, पाइप लाइन बिछाने सहित अन्य कार्य कराए गए हैं। लेकिन अभी तक गांवों को आर्सेनिक मुक्त नहीं किया जा सका है।
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