कासिमाबाद (गाजीपुर)। जिले की अति प्राचीन नगर पंचायत बहादुरगंज अभी भी विकास से कोसों दूर है। नगर पंचायत पर जिसका भी कब्जा रहा उसने नगर के विकास की ओर सोचा तक ही नहीं। नगर में आज भी उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं नदारद हैं। विकास के लिए जो भी धन आया वह बंदरबांट और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। शिक्षा की कौन कहे नगर पंचायत की जनता लंबे समय से पानी, बिजली, सड़क, नाली सहित अन्य समस्याओं से जूझ रही है। यह सारे मुद्दे चुनाव में हवा हो गए हैं।
जिले की उत्तरी सीमा पर टोंस नदी के किनारे और भैंसही नदी के बीचोंबीच स्थित नगर पंचायत बहादुरगंज अंग्रेजों के जमाने की गठित नगर पंचायत है। इस नगर पंचायत का गठन 1837 में किया गया था। तब से लेकर अब तक दर्जनों लोगों ने अध्यक्ष बनकर यहां की नुमाइंदगी की है। बावजूद यह नगर पंचायत वर्तमान में भी पिछड़ेपन की शिकार है। यहां की मुख्य आबादी मुस्लिमों की है। जिनका पूरा रोजी-रोजगार हैंडलूम और बाद में चलकर पावरलूम पर निर्भर है। जिला मऊ से सटा होने के कारण कस्बे का पावरलूम उद्योग से काफी जुड़ाव है। नगर पंचायत में सरकार द्वारा विकास की कई योजनाएं चलाई गई, लेकिन सभी धरातल पर कम ही दिखाई देती हैं। यह योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। पावरलूम उद्योग को बढ़ावा देने के लिए यहां पर केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से लोगों को काफी मदद की गई है, लेकिन इससे जुड़ी सोसाइटी के लोगों ने पूरे धन का बंदरबांट कर दिया। वैसे इस चुनाव में अब तक यहां के स्थानीय मुद्दे हवा हो गए हैं। किसी भी उम्मीदवार ने विकास को अपना मुख्य मुद्दा नहीं बनाया है। जबकि जनता सालों से समस्याओं के मकड़जाल में फंसी सुबक रही है।
मोहम्मद वसीर ने कहा कि नगर पंचायत में छात्र/छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा का कोई विद्यालय नहीं है। यहां के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा प्राप्त लए मऊ के साथ जिला मुख्यालय तक जाना पड़ता है। यह समस्या दशकों से बनी है, लेकिन कोई ध्यान तक नहीं देता।
योगेंद्र राय ने कहा कि इस नगर पंचायत में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं है। आरोप है कि यहां के अस्पताल को कई किलोमीटर दूर देवली गांव में स्थापित करा दिया गया है। जिससे मरीजों को इधर-उधर भटकना पड़ता है।
संतोष जायसवाल ने कहा कि बस स्टैंड से लेकर कस्बे तक की मुख्य सड़क को कई बार बनवाया गया, लेकिन आज भी भ्रष्टाचार के कारण यह सड़क अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही हैं। नदी के किनारे घाट बनवाए गए हैं, लेकिन कुछ ऐसे निर्माण हुए हैं जिसकी कोई जरूरत ही नहीं थी।
विधिनाथ राय ने बताया कि दो वर्षों से नाला निर्माण का कार्य चल रहा है, जो अब तक पूरा नहीं हुआ। इस समय गंदगी के कारण लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। नपं में जो भी अध्यक्ष हुआ विकास के दावे तो सभी ने किए, लेकिन नगर की स्थिति कम बदली उनकी स्थिति जरूर बदल गई।