गाजीपुर। हरिशंकरी की अति प्राचीन रामलीला में गुरुवार की रात बालि-सुग्रीव लड़ाई, बालिवध, हनुमान सीता मिलन तथा लंका दहन नामक लीला का मंचन किया गया। बंदे वाणी विनायकौ के कलाकारों की ओर से प्रस्तुत लीला देख लोग मुग्ध हो गए।
श्रीराम शवरी के बताने के अनुसार ऋश्यमुक पर्वत पर पहुंच कर हनुमान के द्वारा महाराज सुग्रीव से मित्रता करते हैं। उनका सहयोग करने के लिए संकल्प लेते हैं। किश्किंधा नरेश बालि से युद्ध करने के लिए सुग्रीव को भेजते हैं। सुग्रीव अर्द्धरात्रि में बालि के दरवाजे पर जाकर युद्ध के लिए ललकारता है। उसकी ललकार सुनकर उत्तेजित बालि ने सुग्रीव को एक मौका देते हुए कहा कि तुम युद्ध करने के काबिल नहीं हो। इसके बावजूद सुग्रीव युद्ध के लिए ललकारता है। अंत में बालि मजबूर होकर युद्धस्थल पर आता है और युद्ध के दौरान उसे अधमरा कर देता है। सुग्रीव हारकर राम के पास आए और राम ने फिर उसे युद्ध के लिए भेजा। एक पेड़ के सहारे से एक तीर चलाया वह तीर सुग्रीव के सीने में आ लगा। वह कराहते हुए श्रीराम के पास आता है। श्रीराम ने उसको समझाते हुए कहा कि मित्र सुग्रीव मैने बालि पर निशाना साधा। चूंकि तुम दोनों का चेहरा एक ही जैसा लगा। इसलिए मैने आप पर तीर चलाया यह मुझसे भूल हो गई। मैं अब पहचान के लिए माला पहना देता हूं जिससे मैं पहचान सकूं। यह कहते हुए श्रीराम अपने गले की माला सुग्रीव के गले में डाल कर पुन: युद्ध के लिए भेजते हैं। इस बार श्रीराम ने पेड़ के सहारे बालि की पीठ पर तीर मारा। वह तीर बालि के सीने में लगा। श्रीराम की आज्ञानुसार लक्ष्मण किश्किंधा जाकर वानर राज सुग्रीव को राजतिलक करके किश्किंधा का राज सौंप देते हैं। इसके बाद श्रीराम के दूत हनुमान अपने स्वामी की आज्ञानुसार माता सीता का पता लगाने के लिए लंका पहुंचते हैं। हनुमान से मिलने पर विभीषण कहते हैं कि लंकापति रावण जगदंबा सीता का हरण करके अशोक वाटिका के नीचे राक्षसियों के पहरे के अंतर्गत रखा है। इतना सुनने के बाद हनुमान सीता के पास जाकर पेड़ के उपर बैठ जाते हैं। मौका पाकर प्रभु श्रीराम द्वारा मुद्रिका माता सीता के सामने गिरा देते हैं। मुद्रिका देखकर सीता अचंभे में पड़ जाती है। इतने में हनुमानजी मौका पाकर माता सीता को प्रणाम करते हुए राम से संबन्धित सारी बातों को माता सीता से बताते हैं। हनुमानजी बाग के फलों को पेड़ों से तोड़कर खाते हैं और बड़े-बड़े वृक्षों को उखाड़ फेंकते हैं। इस दृश्य को देखकर बागबान रावण के दरबार में जाकर सभी सूचनाओं को बताते हैं। सूचना पाते ही रावण का बड़ा पुत्र मेघनाद अपने पिता की आज्ञा पाकर ब्रम्हास्त्र लेकर बागीचे में आता है। ब्रम्हास्त्र को हनुमान जी के पास फेंकता है। मेघनाद लंकावासियों के सामने से हनुमान को भरी सभा में लाता है। रावण कहते हैं कि वानर बहुत ज्यादा सीमा पार करता जा रहा है इसलिए इसकी जिहवा काट दी जाय। इतना सुनते ही वहां उपस्थित विभीषण ने कहा कि महाराज वानरों की ममता पूंछ पर रहती है। इसकी पूंछ में आग लगा दी जाय। आग लगने पर हनुमान अपनी पूंछ के माध्यम से सोने की लंका को जलाकर राख कर देते हैं। लंका दहन देखकर दर्शकों ने जय श्रीराम का उद्घोष किया ।