कासिमाबाद (गाजीपुर)। आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को आधार कार्ड से लिंक करने की योजना अभी तक परवान नहीं चढ़ पाई है। सरकार आधारकार्ड से आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों तथा गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को भी लिंक कर फर्जीवाड़े को रोकना चाह रही है। शासन के निर्देश के बाद भी जनपद के आंगनबाड़ी केंद्र इस योजना को अमलीजामा पहनाने में नाकाम हैं। पिछले एक साल में महज 83 हजार बच्चों को ही आधार से लिंक किया गया है। जबकि चार लाख से ऊपर बच्चे अभी भी आधार से लिंक नहीं हुए हैं।
जिले में कुल 17 बाल विकास परियोजनाएं संचालित हैं। जिसमें 16 ग्रामीण क्षेत्रों और एक गाजीपुर जिले के नगर क्षेत्र में संचालित हैं। जिसमें 3579 आंगनबाड़ी और 539 मिनी आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। कुल 4118 केंद्रों के माध्यम से तीन से छह माह के 253860 बच्चे और सात माह से तीन साल तक के कुल 248674 बच्चे पंजीकृत है। इसी प्रकार पूरे जिले में गर्भवती और धात्री महिलाएं 96421 पंजीकृत है । मंडल स्तर पर आयोजित समीक्षा बैठक में आयुक्त वाराणसी मंडल ने अक्तूबर माह तक जिले को 3, 79, 214 बच्चों को हर हाल में आधार से लिंक करने का एक लक्ष्य निर्धारित किया है। अब देखना है कि सरकार के निर्देश के बाद पिछले एक वर्ष से लटका यह मामला आयुक्त वाराणसी मंडल के निर्देशों का कितना कड़ाई से पालन करता है। वैसे जिले में शायद ही कोई आंगनबाड़ी है जो बच्चों के साथ गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को आधार से लिंक करने का काम जोर-शोर से कर रहा हो। भारत सरकार द्वारा कालेधन के साथ फर्जीवाड़ा रोकने के लिए हर छोटी बड़ी योजनाओं को आधार कार्ड से लिंक करने के लिए कृत संकल्पित हैं। ठीक उसी प्रकार से उत्तर प्रदेश सरकार भी प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े बच्चों के साथ गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को आधार से लिंक करने का पिछले साल ही दिशा निर्देश जारी की हुई थी। सरकार के आदेश के बाद भी जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों को जोड़ने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई दी। उधर पिछले माह आयुक्त वाराणसी मंडल ने अपनी समीक्षा बैठक में यह सख्त निर्देश दिया कि हर आंगनबाड़ी केंद्र से संबंधित बच्चे एवं धात्री महिलाएं हर हाल में आधार से लिंक हो जाना चाहिए। इस संबंध में जिला कार्यक्रम अधिकारी अमरनाथ मौर्य ने बताया कि अब तक 83 हजार बच्चों को आधार से लिंक कर दिया गया है। हर आंगनबाड़ियों को दिशा निर्देश दिया गया है कि हर हाल में अक्टूबर माह तक लक्ष्य की पूर्ति होनी चाहिए। इसके लिए हर जनसेवा केंद्रों पर छोटे बच्चों का आधार कार्ड बनाने का काम चल रहा है।