मुहम्मदाबाद (गाजीपुर)। शिवरायकापुरा एवं सेमरा के कटान पीड़ित जो विस्थापित कैंपों में खानाबदोश का जीवन जी रहे हैं उन्हें शीघ्र ही कॉलोनी बनाकर लोहिया आवास प्रदान किया जाएगा। इसके लिए जिलाधिकारी संजय कुमार खत्री ने 350 लोहिया आवास बनाए जाने के लिए उपजिलाधिकारी मुहम्मदाबाद को जमीन तलाशने की जिम्मेदारी दी है।
सेमरा एवं शिवरायकापुरा में लगभग डेढ़ दशक पहले से कटान का सिलसिला शुरू हुआ था। तत्कालीन सांसद मनोज सिन्हा के प्रयास से वर्ष 2001-02 में केंद्रीय जल संसाधन मंत्री डा. सीपी ठाकुर ने मौके का निरीक्षण कर कटान रोकने के लिए ठोकर बनाने के लिए धन आवंटित किया लेकिन भ्रष्टाचार के चलते ठोकर गंगा में ही विलीन हो गया। 2012 में धीरे-धीरे गंगा गांव के करीब आकर दस्तक देने लगी और 46 परिवारों का आशियाना गंगा में समा गया। वर्ष 2013 की बाढ़ ने तो गांव में ऐसा कहर बरपाया की शिवरायकापुरा का 90 प्रतिशत एवं सेमरा के 50 प्रतिशत रिहाइशी मकान गंगा की धारा में विलीन हो गए। 558 परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए। 2014 में 23 करोड़ रुपये की लागत से गांव को बचाने के लिए 1560 मीटर ठोकर का निर्माण कराया गया लेकिन निर्माण के समय अनियमितता किए जाने के बावजूद प्रशासन द्वारा ध्यान ने देने के चलते वर्ष 2016 में वह ठोकर भी क्षतिग्रस्त होकर उसका कुछ हिस्सा गंगा में समा गया। इस वर्ष पुन: स्थानीय विधायक अलका राय के प्रयास से लगभग 12 करोड़ रुपये का टेंडर ठोकर मरम्मत के लिए स्वीकृत हुआ है लेकिन धनराशि रिलीज न होने से मरम्मत कार्य शुरू नहीं हो सका है। इससे ग्रामवासियों में गांव के अस्तित्व को लेकर भय पैदा हो गया है। कटान का दंश झेल रहे 377 विस्थापित परिवारों को बसाने के लिए शासन की ओर से एक करोड़ 94 लाख की लागत से शेरपुर एवं जलालपुर मौजा में 4209 हेक्टेयर जमीन क्रय की गई लेकिन कटान पीड़ितों ने यह कहकर वहां बसने से इंकार कर दिया कि वह जमीन बाढ़ प्रभावित इलाके में खरीदी गई है। प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद पुन: सेमरा के कटान पीड़ितों की सरकार ने बसाने का प्रयास शुरू किया है। इसके तहत 350 लोहिया आवास आवंटित किए गए हैं। उपजिलाधिकारी शिवप्रसाद ने बताया कि जिलाधिकारी की तरफ से कटान पीड़ितों की कॉलोनी बनाने के लिए जमीन तलाशने का निर्देश प्राप्त हुआ है। इसके लिए कानूनगो एवं लेखपालों को लगाया गया है कि कम से कम 15 बीघा चरागाह, खलिहान आदि की भूमि तलाश करें, जहां कटान पीड़ितों को आवास बनाकर बसाया जा सके। इसके लिए करमचंदपुर गांव में भूमि चिह्नित की गई थी लेकिन वहां के निवर्तमान ग्राम प्रधान एवं जखनिया के विधायक त्रिवेणी राम ने अपने गांव में दूसरे गांव के लोगों को लाकर बसाने से मना कर दिया। इसके चलते भूमि तलाशने का कार्य पुन: कराया जा रहा है।