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किसान आंदोलन के पर्याय थे स्वामी सहजानंद

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गाजीपुर। स्वामी सहजानंद की जयंती के मौके पर वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि दिनेशचंद्र शर्मा के तुलसी सागर स्थित आवास पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस बीच श्री शर्मा ने कहा कि जहां कहीं भी किसानों के हित और आंदोलन की बात हो, वहां स्वामी सहजानंद का नाम अवश्य लिया जाता है। वह किसान आंदोलन के पर्याय बन गए। कहा कि वह किसान पुत्र काफी सहज हृदय के थे तथा किसानों की समस्याओं को लेकर हमेशा चिंतित रहते थे। वह जानते थे कि जब तक देश का किसान समृद्ध नहीं होगा तब तक देश समृद्ध हो ही नहीं सकता। जनता के हाथ में शासन हो, इसके वह पक्षधर थे। संचालन कर रहे अनिल कुमार अनिलाभ ने कहा कि उनके मिशन की सफलता के लिए किसानों में जागरूकता एवं एकता लाने का भरपूर प्रयास किया गया। अन्य वक्ताओं ने कहा कि वह किसान मजदूर संगठन की स्थापना करना चाहते थे। 1950 में उनका देहांत हो गया जिसके कारण यह सपना अधूरा ही रह गया। इस मौके पर बीके सिंह, ओएन प्रधान, रामबचन प्रसाद, प्रमोद राय आदि मौजूद रहे।
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