गाजीपुर। रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने रेलवे में विकास को काफी ऊंचाई दी है। सभी क्षेत्रों में विकास को पर लग गए, लेकिन अब भी दर्जन भर रेलवे स्टेशन रात को अंधेरे में डूब जाते हैं। यहां सबसे बड़ी समस्या रात के समय स्टेशनों पर समुचित प्रकाश की है। यात्री परेशान हैं, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। मजबूरन वे रात को अंधेरे में ट्रेनों का इंतजार करने को विवश हैं।
औड़िहार -मऊ रेल मार्ग पर सादात तक पड़ने वाले रेलवे स्टेशनों अथवा औड़िहार से बलिया रेल मार्ग पर ताजपुर डेहमा तक के छोटे स्टेशन की हालत लगभग यही है। इन रेलमार्गों पर जिले में पड़ने वाले करीब दर्जन भर स्टेशन ऐसे हैं जहां रात को घोर अंधेरा छाया रहता है। इससे जहां यात्रियों को ट्रेन पकड़ने में असुविधा होती है वहीं अंधेरे में आना- जाना भी खतरनाक साबित होता है। कभी-कभी बुजुर्ग लोग गिर कर घायल हो जाते हैं।
नंदगंज रेलवे स्टेशन पर रात के समय अंधकार छाया रहता है। गाड़ियों के आने-जाने के समय तो जनरेटर चलाया जाता है, लेकिन बाद में उसे बंद कर दिया जाता है। आंकुशपुर स्टेशन पर भी रात को आने वाली मेमू तथा पैसेंजर गाड़ियों को पकड़ने के लिए यात्रियों को अंधेरे में ही इंतजार करना पड़ता है। सहेड़ी हाल्ट का भी यही हालत है। रात को पैसेंजर के गुजर जाने के बाद इन स्टेशनों को कोई देखने वाला नहीं होता। गाजीपुर घाट और शहबाजकुली स्टेशन पर जब गाड़ियों के आने का समय होता है, तो सिर्फ सिग्नल देने के लिए ही जनरेटर चलाया जाता है। बाद में अगर बिजली है तब तो प्रकाश होता है अन्यथा अंधेरा ही कायम रहता है। युसूफपुर स्टेशन पर भी प्लेटफार्म के दोनों किनारों पर प्रकाश की समुचित व्यवस्था नहीं है। मेल तथा एक्सप्रेस गाड़ियों के जनरल डिब्बे अक्सर स्टेशन के बाहरी तथा अंतिम छोर पर रुकते हैं जहां प्रकाश की व्यवस्था नहीं होती। यात्री गिरते पड़ते रहते हैं। दुबिहां संवाददाता के अनुसार करीमुद्दीनपुर स्टेशन पर लगा ट्रांसफार्मर करीब तीन माह से जला पड़ा है। शाम होते ही स्टेशन अंधकार में डूब जाता है। मऊ रुट पर जखनिया, हंसराजपुर, दुल्लहपुर आदि रेलवे स्टेशनों की भी यही दशा है। अंधेरे के कारण सबसे अधिक परेशानी बुजुर्ग तथा महिलाओं को होती है। रात के समय गाड़ी पकड़ना उनके लिए मुश्किल भरा काम होता है। इसी प्रकार पटना रूट पर भी भदौरा, बारा कला आदि स्टेशनों पर अंधकार छाया रहता है। यही हाल ताजपुर डेहमा रेलवे स्टेशन का भी है। यहां घोर अंधेरा छाया रहता है। बिजली गुल होने के बाद स्टेशन पर अंधेेरे के कारण लोग आने से भी कतराते हैं। इतना ही नहीं ढ़ोढ़ाडीह, गाजीपुर घाट, से लेकर सैदपुर भीतरी तक आधी रात को पूरा स्टेशन अंधेेरे में डूब जाता है। बिजली न रहने पर यहां उतरने वाले यात्री किसी तरह घर पहुंचते हैं।