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बिजली के तारों से पूजा पंडालों को खतरा

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गाजीपुर। त्योहारों का सीजन शुरू हो गया है। आगामी दिनों में नवरात्र, दुर्गापूजा, धनतेरस, दीपावली और कई अन्य त्योहार आने वाले हैं। नगर सहित आसपास के कई ग्रामीण इलाकों में इन दिनों दुर्गा पूजा के लिए पंडालों का निर्माण शुरू हो गया है। पंडालों में लकड़ी, कपड़ा, थर्माकोल आदि का प्रयोग किया जा रहा है। कई पंडालों के ऊपर और काफी करीब से बिजली के हाईटेंशन और एलटी तार गुजर रही है। इस खतरे को देखते हुए जहां कई पूजा कमेटी तारों पर प्लास्टिक की पाइप लगवा रहे हैं, वहीं कई पंडालों के पास नंगे तार दौड़ रहे हैं। इससे शार्ट-सर्किट होने पर आग लगने की घटना से इनकार नहीं किया जा सकता है। यदि बिजली के तारों से कहीं कोई खतरा हुआ तो दुर्गापूजा के त्योहार में खलल पड़ सकता हैं।
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नगर के संयुक्त दुर्गा पूजा समिति मुगलपुरा नवाब साहब की ओर से तिराहा पर भव्य दुर्गा पूजा पंडाल का निर्माण कराया जा रहा है। इस पंडाल के निर्माण में भारी मात्रा में लकड़ी, कपड़ा, बोरा, तिरपाल आदि का प्रयोग किया जा रहा है। पांडाल के बगल और पीछे काफी करीब से बिजली का तार गुजरते है। तेज वहां के दौरान तार पंडाल से सट सकता है। इस स्थिति में खतरा हो सकता है। बाल दुर्गा समिति नवाब साहब का फाटक की ओर से नवाबगंज चौराहा पर दुर्गा पूजा के लिए पांडाल का निर्माण कराया जा रहा है। इस पंडाल के निर्माण में भारी मात्रा में लकड़ी, कपड़ा आदि का इस्तेमाल किया जा रहा है। पांडाल के बगल से करीब एक हाथ की दूरी पर बिजली के तार गुजर रहे है। तार पर कवर भी नहीं लगाया गया है। ऐसे में तारों में शार्ट-सर्किट होने पर टूटने से किसी दुर्घटना की अंशंका बनी हुई है। शहर के भुतहियाटाड़ चौराहा पर दुर्गा पूजा के लिए पूजा समिति की तरफ से भव्य पंडाल का निर्माण करवाया जा रहा है। इस पंडाल के बगल से जहां एबीसी केबिल गुजर रहा है, वहीं ऊपर से 11 हजार लाइन भी है। यह तार पंडाल के काफी करीब है, जिससे खतरा बना हुआ है। हाईटेंशन की स्थिति यह होती है कि टूटकर गिरने पर यह जमीन को खुरदरा करने के साथ ही हरी घास को भी जला देता है। नगर के सकलेनाबाद में श्रीश्री दुर्गा पूजा समिति दुर्गा चौक की तरफ दुर्गा पूजा के लिए लंबे-चौड़े पंडाल का निर्माण कराया जा रहा है। इस पंडाल में बांस-बल्ली के साथ ही बड़ी मात्रा में लकड़ी और कपड़े का इस्तेमाल करने के साथ ही पानी से बचाव के लिए प्लास्टिक की चादर का इस्तेमाल किया जा रहा है। पंडाल के काफी करीब से एलटी की तार गुजर रही है, जिसे पंडाल से सटने से रस्सी से बांधकर एक तरफ खींचा गया है। अगर यह तार दगा दे गया तो, किसी खतरा से इनकार नहीं किया जा सकता है।
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